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रायपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश और न्यायपालिका कर्मचारियों की पढ़ाई से जुड़े दो अहम मामलों में स्पष्ट दिशा निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल) ने PG मेडिकल सीटों के विवाद पर फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश नियम, 2025 में किए गए संशोधनों के बाद किसी भी अभ्यर्थी का पहले से आवंटित सीट पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं रहता। नियमों में बदलाव और काउंसलिंग रद्द होने से पुराने एडमिशन को मान्यता नहीं दी जा सकती।
भिलाई निवासी अनुष्का यादव ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने मेरिट के आधार पर निजी मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल करने का दावा किया। राज्य सरकार ने कहा कि काउंसलिंग रद्द करना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन था और डोमिसाइल आधारित आरक्षण असंवैधानिक है। हाई कोर्ट ने सरकार का पक्ष सही मानते हुए कहा कि प्रोविजनल अलॉटमेंट को अंतिम नहीं माना जा सकता और अब इस मुद्दे पर कोई नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में कार्यरत कर्मचारी नियमित छात्र के रूप में पढ़ाई नहीं कर सकते। बिलासपुर के मामले में रायपुर जिला कोर्ट में असिस्टेंट ग्रेड-3 पद पर कार्यरत अजीत चौबेलाल गोहर की सिंगल बेंच की अनुमति रद्द कर दी गई। डिवीजन बेंच ने कहा कि जिला न्यायपालिका स्थापना नियम 2023 के तहत कोई भी कर्मचारी नियमित छात्र के रूप में परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता; केवल प्राइवेट या पत्राचार के माध्यम से ही पढ़ाई संभव है।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सिंगल बेंच ने विभाग को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना आदेश दिया था, जो न्यायिक अनुशासन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था। इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में PG मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया और न्यायपालिका कर्मचारियों की शैक्षणिक नियमावली दोनों ही स्पष्ट हो गई हैं।