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Hi-tech mobile forensic van started in Durg
दुर्ग। अपराध जांच को और अधिक वैज्ञानिक, तेज और विश्वसनीय बनाने की दिशा में दुर्ग जिले को बड़ी सौगात मिली है। भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग द्वारा प्रदत्त सीन ऑफ क्राइम फॉरेंसिक मोबाइल वाहन का शुभारंभ दुर्ग में किया गया। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव मुख्य अतिथि रहे, जबकि सांसद विजय बघेल ने अध्यक्षता की। इस अवसर पर दुर्ग संभाग के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, न्यायिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
अब मौके पर ही होगी प्राथमिक फॉरेंसिक जांच
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि दुर्ग जिले के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण और सौभाग्य का दिन है। हाल ही में क्षेत्रीय न्यायालयीन विज्ञान प्रयोगशाला की शुरुआत के बाद अब जिले को मोबाइल फॉरेंसिक लैब वाहन मिला है, जिससे अपराध जांच में तेजी आएगी।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि बरामद पदार्थ वास्तव में मादक पदार्थ है या नहीं। अब मोबाइल फॉरेंसिक वैन मौके पर ही उसकी प्रारंभिक जांच कर सकेगी। इसके अलावा संदिग्ध मौत, डीएनए परीक्षण और अन्य कई तकनीकी जांच, जिनके लिए पहले बड़े शहरों या निजी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब ऑन-द-स्पॉट संभव हो सकेगी।
मंत्री ने कहा कि यह वाहन पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए त्वरित समाधान का माध्यम बनेगा और अपराध अनुसंधान प्रणाली को मजबूत करेगा।
पुलिसिंग व्यवस्था पर बढ़ेगा जनता का भरोसा : विजय बघेल
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि लगातार पुलिसिंग व्यवस्था में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, जिससे लोगों का विश्वास मजबूत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जिले को 112 सेवा के लिए 35 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थीं और अब मोबाइल फॉरेंसिक वैन शुरू होने से कानून व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
सांसद ने कहा कि पहले जांच के लिए नमूनों को लाने-ले जाने में काफी समय लगता था, जिससे जांच प्रभावित होती थी। अब यह वैन घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल फॉरेंसिक परीक्षण करेगी, जिससे समय की बचत होगी और लोगों में भरोसा बढ़ेगा कि पुलिस आधुनिक तकनीक के साथ गंभीरता से जांच कर रही है।
65 लाख की हाईटेक वैन, वैज्ञानिक तरीके से होगा सैंपल कलेक्शन
दुर्ग संभाग के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में मोबाइल फॉरेंसिक वैन का फ्लैग ऑफ किया गया है और दुर्ग को भी यह सुविधा मिली है। एक वैन की कीमत लगभग 65 लाख रुपये है।
उन्होंने कहा कि इस वैन से दो बड़े फायदे होंगे। पहला, अपराध स्थल से सैंपल कलेक्शन अधिक वैज्ञानिक और विश्वसनीय तरीके से किया जाएगा, जिससे न्यायालय में उसकी स्वीकार्यता और मजबूती बढ़ेगी। दूसरा, जनता को भी यह महसूस होगा कि उनके मामलों को गंभीरता से और तकनीकी दक्षता के साथ हैंडल किया जा रहा है।

आईजी ने बताया कि अब सामान्य जांच अधिकारी की बजाय प्रशिक्षित वैज्ञानिक अधिकारी घटनास्थल से सैंपल उठाएंगे। इससे केस की गुणवत्ता सुधरेगी और प्रोसिक्यूशन रेट बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी।
“यह एक मिनी फॉरेंसिक लैब है” : वैज्ञानिक अधिकारी
क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, दुर्ग के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पंकज ताम्रकार ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत सभी राज्यों को मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। 18 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, गृह मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की उपस्थिति में इसका शुभारंभ किया गया था।
उन्होंने बताया कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि घटनास्थल पर साक्ष्यों के कंटामिनेशन को कम किया जा सके। अक्सर साक्ष्यों की सही तरीके से लिफ्टिंग, प्रिजर्वेशन और फॉरवर्डिंग नहीं होने से जांच प्रभावित होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए वैन को हाईटेक और फुली इक्विप्ड बनाया गया है।
वैन में मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं
मोबाइल फॉरेंसिक वैन में कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से घटनास्थल पर ही प्राथमिक जांच की जा सकेगी। इनमें शामिल हैं-
डिजिटल एविडेंस कलेक्शन सिस्टम
डीएनए सैंपल कलेक्शन सुविधा
ऑन-द-स्पॉट फिंगरप्रिंट लिफ्टिंग
ड्रग डिटेक्शन किट
बायोलॉजिकल फ्लूइड जांच सुविधा
गनशॉट रेसिड्यू कलेक्शन
लैपटॉप और डेटा सिस्टम
रेफ्रिजरेटर
जनरेटर सेट (24×7 संचालन हेतु)
पंकज ताम्रकार ने कहा कि यह वाहन एक तरह की “मिनी फॉरेंसिक लैब” है, जो घटनास्थल पर ही प्राथमिक स्क्रीनिंग और शुरुआती रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी। इससे जांच एजेंसियों को तुरंत दिशा तय करने और आगे की कार्रवाई में मदद मिलेगी।
तीन सदस्यीय टीम करेगी संचालन
उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में इस मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन के लिए तीन सदस्यीय टीम नियुक्त रहेगी, जिसमें एक ड्राइवर, एक टेक्नीशियन और एक वैज्ञानिक अधिकारी शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय लैब खुलने के बाद पहले से रिपोर्ट देने का समय कम हुआ है और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। अब मोबाइल फॉरेंसिक वैन आने से घटनास्थल पर ही जांच शुरू होने से रिस्पॉन्स टाइम कम होगा, साक्ष्यों का कंटामिनेशन घटेगा और जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी।