

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

High Court approves rationalization policy; all teachers' petitions dismissed.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और शालाओं के युक्तियुक्तकरण की राज्य सरकार की नीति को वैध ठहराते हुए इसे चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ सहित प्रदेशभर के शिक्षकों द्वारा दायर 24 से अधिक याचिकाओं को निरस्त कर दिया।
सरकार का फैसला जनहित में माना
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के तर्कसंगत और समान वितरण के उद्देश्य से लागू की गई युक्तियुक्तकरण नीति जनहित में है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार का यह कदम उचित और आवश्यक है।
कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विषय है। किसी भी सरकारी कर्मचारी को एक ही स्थान पर बने रहने का न तो संवैधानिक और न ही कानूनी अधिकार प्राप्त है। इसलिए केवल स्थानांतरण के आधार पर नीति को चुनौती नहीं दी जा सकती।
राज्य सरकार ने शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों का युक्तियुक्तकरण किया है। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश की 10,463 शालाओं को शामिल किया गया, जिनमें 10,297 ऐसे स्कूल हैं जो एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र के वाचन को लेकर दायर याचिका भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया था।
अब्दुल सलाम रिजवी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि सरकारी स्कूलों में धार्मिक मंत्रों का वाचन संविधान के अनुच्छेद 28 की भावना के विपरीत है। साथ ही इसे अनुच्छेद 14, 21 और 25 का भी उल्लंघन बताया गया था। हालांकि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा।