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Political battle over Nakti displacement intensifies; BJP and Congress lock horns over the issue of 77 families.
रायपुर। नवा रायपुर के नकटी (सम्मानपुर) गांव में विधायक कॉलोनी के लिए भूमि अधिग्रहण और 77 परिवारों के विस्थापन का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस राज्य सरकार पर गरीबों को बेघर करने का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि इस परियोजना की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हो गई थी। दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं और पुराने सरकारी दस्तावेज भी सामने आ रहे हैं।
हाउसिंग बोर्ड और राजस्व विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, विधायक आवासीय योजना के लिए 15.479 हेक्टेयर शासकीय भूमि के आवंटन की प्रक्रिया वर्ष 2020 में शुरू हुई थी। एक सितंबर 2021 को गृह निर्माण मंडल ने कलेक्टर कार्यालय को प्रस्ताव भेजकर संबंधित भूमि आवंटित करने की मांग की थी। इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने नियमानुसार आपत्तियां आमंत्रित कीं, लेकिन किसी भी विभाग ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।पटवारी और राजस्व निरीक्षक की वर्ष 2021 की रिपोर्ट में करीब तीन हेक्टेयर क्षेत्र में कच्चे मकानों और बाड़ी के रूप में अतिक्रमण दर्ज किया गया था। हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि वर्ष 2023 तक यह अतिक्रमण बढ़कर करीब 15 हेक्टेयर तक पहुंच गया, जहां बड़ी संख्या में पक्के मकान बना लिए गए।
भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नकटी में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में गरीब परिवारों के घर तोड़ना किसी भी सभ्य व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।उन्होंने प्रशासन से मांग की कि यदि पुनर्वास आवश्यक था तो पहले प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। सांसद ने कहा कि वे लंबे समय से इस मुद्दे के समाधान का प्रयास करते रहे हैं और आगे भी ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे।
दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए 13 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति के संयोजक पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेन्द्र साहू बनाए गए हैं। इसमें पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, जिला कांग्रेस अध्यक्षों सहित प्रभावित ग्रामीणों को भी शामिल किया गया है।कांग्रेस की ओर से कई विधायकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की है। हाल ही में विधायक संगीता सिन्हा, यशोदा निलांबर वर्मा और हर्षिता स्वामी बघेल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। इससे पहले कई अन्य कांग्रेस विधायक भी इसी तरह की मांग कर चुके हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव गुरुवार को नकटी गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने बरसात के मौसम में की गई प्रशासनिक कार्रवाई को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।
पूर्व महापौर एजाज ढेबर और कांग्रेस पार्षद अर्जुमन ढेबर ने भी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों को चावल, आटा, दाल, शक्कर, पेयजल और अन्य जरूरी सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि बिना समुचित पुनर्वास के लोगों को बेघर करना संवेदनहीनता है और कांग्रेस प्रभावितों को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी रखेगी।
प्रदेश कांग्रेस की जांच समिति शुक्रवार सुबह प्रभावित परिवारों के साथ कलेक्टर से मुलाकात करेगी। समिति पुनर्वास की समुचित व्यवस्था, उचित मुआवजा और प्रभावित ग्रामीणों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की मांग रखेगी।इस बीच नकटी विस्थापन का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ प्रशासनिक फैसलों और पुनर्वास व्यवस्था को लेकर भी चर्चा का केंद्र बन गया है।