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High Court cracks down on corruption; even offenses in the last few years are enough for dismissal
हरियाणा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार का मामला यदि कर्मचारी के कार्यकाल के अंतिम वर्षों में भी सामने आता है, तो वह सेवा से बर्खास्तगी के लिए पर्याप्त आधार है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल टूटेगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई कमजोर पड़ सकती है।
एएसआई की याचिका खारिज, बर्खास्तगी बरकरार
हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस के एएसआई ईश्वर सिंह की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका को पूरी तरह आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार एक गंभीर कदाचार है और लंबी सेवा अवधि, प्रशंसा प्रमाण पत्र या पेंशन का दावा भी दोषी अधिकारी को राहत नहीं दिला सकता।
32 साल की सेवा भी नहीं बनी ढाल
रिकॉर्ड के अनुसार ईश्वर सिंह ने वर्ष 1975 में हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में सेवा शुरू की थी। पदोन्नति के बाद वर्ष 2006 में उन्हें पंचकूला थाने में एएसआई बनाया गया। इसी दौरान 15 फरवरी 2006 को उन पर एक शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई और उन्हें निलंबित कर दिया गया।
जांच में रिश्वत लेने की पुष्टि
विभागीय जांच में रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने कारण बताओ नोटिस जारी किया और 18 जनवरी 2008 को एएसआई ईश्वर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
तकनीकी दलीलें भी कोर्ट ने ठुकराईं
याचिकाकर्ता ने बर्खास्तगी को तकनीकी आधारों पर चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एएसआई के मामले में पुलिस अधीक्षक ही सक्षम प्राधिकारी है। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार का मामला अत्यंत गंभीर होता है और ऐसे मामलों में सहानुभूति का कोई स्थान नहीं है।