

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

High Court stays recovery of ₹1.41 crore loan granted without consent.
अगर आपको भी पर्सनल लोन के लिए कोई फोन आता है या किसी एप द्वारा लोन देने की बात कही जाती है, तो आपके लिए यह खबर जानना जरूरी है।
दरअसल, बिलासपुर हाई कोर्ट ने बिना सहमति पर्सनल लोन स्वीकृत किए जाने और इसके बाद रिकवरी एजेंटों द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ना दिए जाने के दो अलग-अलग मामलों में सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने संबंधित बैंकों और रिकवरी एजेंटों को फिलहाल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दिया है।
एक मामला सिम्स का है, जहां स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत वर्षा बेक ने अधिवक्ता अनिरुद्ध सिंह के माध्यम से एक याचिका दायर किया है, जिसमें कहा गया है, कि अप्रैल 2023 में स्पैश एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्ट सेलिंग एजेंट मनोज कुमार भगत ने फोन कर पर्सनल लोन दिलाने का प्रस्ताव दिया था, जबकि याचिकाकर्ता केवल आदित्य बिड़ला कैपिटल से 5 लाख 40 हजार रुपए का ऋण लेने के लिए ही सहमत हुई थी, लेकिन इसके बावजूद निजी एजेंसियों और बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से याचिकाकर्ता की सहमति के बिना विभिन्न बैंकों से करीब 46 लाख 20 हजार रुपए के कई पर्सनल लोन स्वीकृत कराकर राशि उसके खाते में जमा करा दी गई।
याचिकाकर्ता के अनुसार, आपत्ति करने पर डीएसए ने ऋण की 50 प्रतिशत राशि अपने खातों में ट्रांसफर करने को कहा और ईएमआई स्वयं चुकाने का भरोसा दिलाया। कुछ महीने तक भुगतान करने के बाद ईएमआई देना बंद कर दिया गया। इसके बाद रिकवरी एजेंटों द्वारा याचिकाकर्ता और उसके परिवार को कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से अपमानित और प्रताड़ित किया जाने लगा।
इस मामले में हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर को कोर्ट में हाजिर होने को कहा है।