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CG High Court: High Court takes a firm stand on an adopted son's claim for compassionate appointment; dismissing the application without examining the adoption deed is incorrect.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति मृत शासकीय कर्मचारी का विधिवत दत्तक पुत्र होने का दावा करता है और उसके समर्थन में गोदनामा प्रस्तुत करता है, तो सक्षम प्राधिकारी का दायित्व है कि वह पहले उस गोदनामा की वैधता और प्रामाणिकता की जांच करे। केवल उसे मृत कर्मचारी का भतीजा मानकर आवेदन खारिज करना न्यायसंगत नहीं है।
न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ कृषि उपज मंडी समिति, कसडोल और कृषि विपणन बोर्ड द्वारा पारित आदेश को निरस्त करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता राहुल तिवारी मृतक सोभनाथ तिवारी के भतीजे थे। सोभनाथ तिवारी कृषि उपज मंडी समिति, कसडोल में शासकीय सेवक के रूप में कार्यरत थे। उनकी मृत्यु के बाद राहुल तिवारी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया और दावा किया कि उन्हें सोभनाथ तिवारी ने विधिवत गोद लिया था, इसलिए वे उनके दत्तक पुत्र हैं और अनुकंपा नियुक्ति के पात्र हैं।
हालांकि, 20 फरवरी 2018 को कृषि विपणन बोर्ड और मंडी समिति ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि राहुल मृतक के भतीजे हैं, इसलिए वे अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल त्रिपाठी ने हाई कोर्ट को बताया कि अधिकारियों के समक्ष विधिवत निष्पादित गोदनामा (दत्तक ग्रहण पत्र) प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने उस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर विचार किए बिना आवेदन खारिज कर दिया, जो कानून के अनुरूप नहीं है।
हाई कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं को मृत कर्मचारी का दत्तक पुत्र साबित करने के लिए गोदनामा प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने उस दस्तावेज की न तो जांच की और न ही उसकी वैधता पर कोई विचार किया।
अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा दत्तक पुत्र होने का दावा किया जाता है, तो पहले गोदनामा की सत्यता और कानूनी वैधता की जांच की जानी चाहिए। बिना इस प्रक्रिया का पालन किए केवल भतीजा मानकर आवेदन खारिज करना उचित नहीं है।
हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कृषि उपज मंडी समिति द्वारा 20 फरवरी 2018 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रस्तुत गोदनामा की वैधता और प्रामाणिकता की जांच कर कानून के अनुसार याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति आवेदन पर नए सिरे से निर्णय लें।