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Serious questions raised about emergency services in the capital; young man dies while waiting for an ambulance.
रायपुर। राजधानी में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बोरियाखुर्द निवासी 20 वर्षीय प्रवीण कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। गंभीर हालत में परिजनों को मजबूरी में मालवाहक वाहन से उसे एम्स ले जाना पड़ा, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।इस घटना ने प्रदेश में चल रही आपात सेवाओं की निगरानी और संचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब पुलिस, फायर और एंबुलेंस जैसी सेवाओं के लिए डायल 112 व्यवस्था पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात प्रवीण कुमार की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। उसे पूरे शरीर में तेज दर्द होने लगा और कुछ ही समय में उसकी हालत गंभीर हो गई।परिजनों ने तत्काल मदद के लिए 108 नंबर पर संपर्क किया, लेकिन कॉल डायल 112 केंद्र पर ट्रांसफर हो गई। मृतक के जीजा लक्ष्मीनारायण नागरची के अनुसार, रात करीब 8 बजे से 8.33 बजे तक लगातार एंबुलेंस के लिए कॉल किए गए।कॉल सेंटर से मरीज की स्थिति, पता और अन्य जानकारी ली जाती रही। परिजनों को वाहन भेजने का भरोसा दिया गया, लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची।
प्रवीण की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। परिजनों ने उसे स्कूटी से अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन कमजोरी और तेज दर्द के कारण वह बैठ नहीं पाया।इसके बाद परिवार ने मजबूरी में एक मालवाहक वाहन की व्यवस्था की और उसी से उसे एम्स पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण रविवार सुबह करीब 9.30 बजे उसकी मौत हो गई।डॉक्टरों के अनुसार, युवक के फेफड़ों में संक्रमण था।
परिजनों ने आपात व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य समय पर मरीज की जान बचाना है, वह जरूरत के समय उपलब्ध नहीं हो सकी।परिवार का कहना है कि प्रवीण की मौत के बाद मुक्तांजलि शव वाहन सूचना मिलने के कुछ ही मिनटों में पहुंच गया। इस अंतर ने पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक के जीजा लक्ष्मीनारायण नागरची ने बताया कि प्रवीण सिकलसेल बीमारी से पीड़ित था। शनिवार रात उसकी हालत अचानक बिगड़ गई थी।उन्होंने कहा कि मदद के लिए कई बार डायल 112 पर संपर्क किया गया, लेकिन हर बार मरीज की जानकारी और लोकेशन पूछने में समय निकलता रहा। आखिरकार निजी वाहन से उसे एम्स ले जाना पड़ा।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्था पर नाराजगी जताई है।लोगों का कहना है कि अगर राजधानी रायपुर में ही गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है, तो दूरदराज इलाकों में आपात सेवाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रदेश में डायल 112 के माध्यम से पुलिस, फायर और एंबुलेंस जैसी आपात सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इस व्यवस्था पर हर साल बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आना निगरानी और संचालन प्रणाली की खामियों को उजागर करता है।अब जरूरत है कि आपात सेवाओं की जवाबदेही तय हो और गंभीर मरीजों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।