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High Court takes a tough stance on the Telegram ban ahead of the NEET-UG re-exam; asks the Central Government pointed questions.
नई दिल्ली। नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कई अहम सवाल किए हैं। अदालत ने पूछा कि कुछ परीक्षार्थियों की कथित गलत गतिविधियों के कारण देश के करोड़ों टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं के अधिकारों पर रोक कैसे लगाई जा सकती है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
टेलीग्राम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस कारिया की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि कुछ लोगों की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म के करोड़ों उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करना उचित कैसे माना जा सकता है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस कदम की आवश्यकता और औचित्य पर विस्तृत जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि टेलीग्राम का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है। उनके मुताबिक यह प्लेटफॉर्म पेपर लीक, साइबर धोखाधड़ी, ड्रग्स तस्करी, बाल शोषण, आतंकवादी गतिविधियों और अन्य गैरकानूनी कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम का तकनीकी ढांचा ऐसा है कि एक अकाउंट से कई बॉट बनाए जा सकते हैं, जिससे प्रतिबंधित सामग्री दोबारा तेजी से फैल जाती है।
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि टेलीग्राम अपराधियों और आतंकवादी संगठनों के लिए नए 'डार्क वेब' की तरह काम कर रहा है। सरकार का दावा है कि कई चरमपंथी संगठन और अपराधी नेटवर्क इसी प्लेटफॉर्म के जरिए अपने संदेश और अवैध सामग्री साझा करते हैं। पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क भी टेलीग्राम चैनलों और ग्रुपों का इस्तेमाल करते हैं।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर यह कदम जरूरी था। उन्होंने अदालत से कहा कि यदि ऐसे प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण नहीं किया गया तो गंभीर सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
इस बीच, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को निर्देश जारी करते हुए 20 और 21 जून को छात्रों को सामान्य अवकाश नहीं देने को कहा है। केवल विशेष परिस्थितियों में ही छुट्टी स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ सहित देशभर में परीक्षा के दौरान सतर्कता बढ़ा दी गई है।
प्रदेश के 16 मेडिकल कॉलेजों में परीक्षा से जुड़ी निगरानी बढ़ाई गई है। छत्तीसगढ़ में लगभग 50 हजार छात्र री-एग्जाम में शामिल होंगे। बिलासपुर स्थित सिम्स ने परीक्षार्थियों के लिए 24 घंटे की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन भी शुरू की है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने परीक्षार्थियों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनें चलाने तथा कई ट्रेनों में अतिरिक्त सामान्य कोच लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा हसदेव एक्सप्रेस का भी अस्थायी विस्तार किया गया है ताकि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में अभ्यर्थियों को सुविधा मिल सके।
इधर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में न्यायिक हिरासत में बंद छात्र को नीट-यूजी 2026 की परीक्षा देने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि छात्र को पुलिस सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र ले जाया जाए और परीक्षा समाप्त होने के बाद वापस जेल भेजा जाए। साथ ही जेल प्रशासन को छात्र को आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।