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High Court takes a tough stance on the sluggish pace of RTE admissions.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया की धीमी रफ्तार पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के 25 दिन बाद भी प्रदेश में आरटीई के तहत उपलब्ध करीब 88 प्रतिशत सीटें खाली हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी, जिसमें सरकार को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी।
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दायर शपथपत्र के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए निजी स्कूलों को आरटीई के तहत 339 करोड़ रुपये प्रतिपूर्ति के रूप में दिए जा रहे हैं। वहीं प्रदेश के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत 9,984 सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन अब तक केवल 1,174 बच्चों को ही प्रवेश मिल पाया है। यानी 8,810 सीटें अभी भी खाली हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि गरीब और वंचित वर्ग के पात्र बच्चों को समय पर शिक्षा का अधिकार मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाकर अधिक से अधिक पात्र बच्चों का दाखिला कराया जाए और अगली सुनवाई में इसकी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।