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History created in Bilaspur: 1500 'Bal Vivekanandas' made world record
बिलासपुर। स्वामी विवेकानंद जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर बिलासपुर ने ऐसा ऐतिहासिक आयोजन देखा, जिसने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। पुलिस ग्राउंड में आयोजित स्वामी विवेकानंद चेतना महोत्सव के दौरान 1500 बच्चों ने स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में सामूहिक रूप से पूर्ण वंदेमातरम का गायन किया और नशामुक्ति की शपथ लेकर समाज को एक मजबूत संदेश दिया। यह प्रेरक आयोजन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
रिकॉर्ड टीम ने मंच से इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव को प्रमाण पत्र सौंपा। जैसे ही विश्व रिकॉर्ड की घोषणा हुई, पूरा पुलिस ग्राउंड तालियों और जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रभावशाली क्षण तब आया, जब 1500 ‘बाल विवेकानंद’ एक साथ खड़े होकर नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प ले रहे थे। एकरूप वेशभूषा, अनुशासित पंक्तियां और बुलंद आवाज़ में लिया गया संकल्प हर मौजूद व्यक्ति के दिल को छू गया। यह दृश्य केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ी के मजबूत चरित्र और जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रतीक बन गया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “यह सिर्फ एक विश्व रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने का सशक्त प्रयास है। जब बच्चे नशे के खिलाफ संकल्प लेते हैं, तो समझिए समाज का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।”
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं और बिलासपुर का यह आयोजन पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा।
कार्यक्रम के बाद पुलिस ग्राउंड से एक विशाल और भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें 1500 बाल विवेकानंदों के साथ हजारों नागरिक शामिल हुए। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए विवेकानंद उद्यान पहुंची, जहां मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
शहर का वातावरण देशभक्ति, युवाशक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से पूरी तरह ओतप्रोत नजर आया। सड़कों के दोनों ओर खड़े नागरिकों ने पुष्पवर्षा और तालियों के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया।
यह आयोजन केवल एक विश्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देने में सफल रहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब मंचों से निकलकर बच्चों और युवाओं के संकल्प में बदल रही है। बिलासपुर ने इस ऐतिहासिक आयोजन के माध्यम से यह साबित कर दिया कि जब संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति एक साथ जुड़ते हैं, तो वे पूरी दुनिया में पहचान बना सकते हैं।