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Impact of Cyclone Murasu: Alert issued for rain and strong winds in Bastar division over the next two days; farmers' concerns grow.
जगदलपुर। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात मुरासू ने एक बार फिर मौसम का रुख बदल दिया है। चक्रवात अर्णब का प्रभाव पूरी तरह समाप्त होने से पहले ही नए तूफान ने मौसम विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इसके प्रभाव से बस्तर संभाग में रविवार शाम से रुक-रुककर हल्की बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने सोमवार और मंगलवार के बाद बुधवार तक भी संभाग के कई इलाकों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात मुरासू उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट की ओर पहुंच रहा है। सोमवार देर रात से मंगलवार तड़के के बीच इसके ओंगोल के आसपास तट से टकराने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जबकि कुछ परिस्थितियों में इसकी गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
चक्रवात का प्रभाव बस्तर संभाग के मौसम पर भी दिखाई देगा। मौसम विभाग ने मंगलवार और बुधवार को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है। बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिले विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश भी हो सकती है।
बारिश के साथ तेज हवाओं की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना को देखते हुए कृषि संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। तेज हवा और लगातार बारिश के कारण फसलों के गिरने तथा जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज और खेतों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने चाहिए।
बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान बढ़कर करीब 29 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। समुद्र के असामान्य रूप से गर्म होने को चक्रवाती गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थिति माना जा रहा है। इसी वजह से एक सप्ताह के भीतर दूसरा चक्रवात विकसित हुआ है। इससे पहले आए अर्णब के बाद अब मुरासू भी गंभीर चक्रवात का रूप ले चुका है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मुरासू का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा। चक्रवात के कमजोर पड़ने के बाद भी पूर्वी भारत, मध्य भारत और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही तथा बारिश का दौर जारी रह सकता है। हालांकि उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
चक्रवात के बीच उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की संभावना कम है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में वर्षा और बर्फबारी हो सकती है।हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में फिलहाल मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के अधिकांश क्षेत्रों में भी बारिश के आसार नहीं हैं। दिन के समय धूप खिली रह सकती है, जबकि सुबह और रात के तापमान में गिरावट से ठंड का अहसास बढ़ने लगेगा।