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Latest News: India will move towards 100% ethanol, making major preparations to reduce petrol dependence
नई दिल्ली। देश में भविष्य में पेट्रोल की जगह एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनने के लिए 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए।
आयातित तेल पर भारी खर्च
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत वर्तमान में अपनी लगभग 87% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिस पर हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका है, ऐसे में देश को वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ना जरूरी हो गया है।
E-20 से आगे बढ़ने की तैयारी
सरकार ने वर्ष 2023 में 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) लॉन्च किया था। अब इसे आगे बढ़ाते हुए E-85 ईंधन की दिशा में काम किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही E-85 ईंधन के लिए ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है।
दुनिया में कहां उपयोग हो रहा E-85
वर्तमान में अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में E-85 ईंधन सीमित स्तर पर उपलब्ध है। वहीं ब्राजील एथेनॉल उपयोग में दुनिया का अग्रणी देश है, जहां पेट्रोल में 27% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य है और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के कारण 100% एथेनॉल (E-100) का उपयोग भी संभव है।
क्या हैं फ्लेक्स-फ्यूल वाहन?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे होते हैं, जिन्हें अलग-अलग एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है। इनके इंजन, पाइप, सील और सेंसर उच्च एथेनॉल मिश्रण को सहने में सक्षम होते हैं। ये वाहन E-20 से लेकर E-85 तक आसानी से चल सकते हैं।
सामान्य वाहनों में खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य पेट्रोल वाहन E-85 ईंधन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। अधिक एथेनॉल मिश्रण से इंजन में जंग लगने, पाइप और रबर सील खराब होने, स्टार्टिंग में दिक्कत और परफॉर्मेंस पर असर पड़ने का खतरा रहता है।