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MP News: Indore contaminated water scandal: Hearing on three public interest petitions filed in the High Court, notice sent to the corporation
इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और बढ़ते बीमारियों के मामलों ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटा दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैल रही बीमारी को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने एक याचिका पर नगर निगम अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मौतों और मरीजों के आंकड़ों पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नगर निगम और प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट के सामने मरीजों और मौतों का जो आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है, वह वास्तविकता से मेल नहीं खाता। याचिकाकर्ता एडवोकेट रितेश हिरानी ने दावा किया कि अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 1400 से अधिक लोग उपचार करवा रहे हैं, जबकि अदालत में इससे अलग आंकड़े दिए गए।
अधिकारियों पर एफआईआर की मांग
एक अन्य याचिका में जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि समय रहते कार्रवाई न होने और पानी की सप्लाई में लापरवाही के कारण लोगों की जान गई।
6 जनवरी को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम और संबंधित विभागों से विस्तृत जवाब तलब किया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
गौरतलब है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी सप्लाई होने के बाद बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त और संक्रमण से बीमार पड़ गए थे। कई मौतों के बाद यह मामला राज्य से लेकर केंद्र स्तर तक सुर्खियों में है और विपक्ष लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का सख्त एक्शन
इधर, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के मामले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। समीक्षा के बाद उन्होंने तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। लापरवाही के मद्देनज़र नगर निगम आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि अपर आयुक्त को इंदौर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।