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Intensifying rivalry in the global AI race; China and the US go head-to-head.
नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और तेज होती दिखाई दे रही है। चीन ने सदस्य देशों के लिए अपने नेतृत्व में ओपन सोर्स एआई इकोसिस्टम विकसित करने की पहल का प्रस्ताव रखा है। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका चीन से आगे है।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से ब्रिक्स देशों को एआई तकनीक के साझा विकास और उपयोग से जोड़ने की पहल ऐसे समय हुई है, जब दुनिया के प्रमुख देशों के बीच एआई तकनीक पर नियंत्रण और नेतृत्व को लेकर होड़ बढ़ रही है।
चीन ने करीब दो महीने पहले 29 देशों के साथ मिलकर वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन बनाने की पहल की थी। अब ब्रिक्स मंच पर भी इस दिशा में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। बीते 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स के समापन सत्र में शी जिनपिंग ने चीन को एआई के लिए ओपन सोर्स समुदाय तैयार करने में अग्रणी बताते हुए बड़े भाषा मॉडल के विकास और उपयोग में सहयोग का भरोसा दिलाया।चीन की रणनीति विकासशील देशों को अपने एआई प्लेटफॉर्म और तकनीकी संसाधनों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है। इससे उसे वैश्विक एआई बाजार में अपनी हिस्सेदारी और प्रभाव मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
दूसरी ओर अमेरिका में एआई क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां चीन की तकनीकी प्रगति को लेकर सतर्क हैं। अमेरिका ने चिप, सेमीकंडक्टर, क्लाउड सेवाओं और कुछ फ्रंटियर मॉडल से जुड़ी तकनीक के निर्यात पर पहले ही कई तरह के नियंत्रण लगाए हैं।अमेरिकी प्रशासन का जोर एआई तकनीक में अपनी बढ़त बनाए रखने पर है। इसी वजह से चीन और अमेरिका के बीच एआई से जुड़े संसाधनों, कंप्यूटिंग क्षमता और अत्याधुनिक तकनीक को लेकर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
चीन 29 देशों के साथ वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ चुका है। वहीं अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्ट में 34 देश शामिल हैं। इन दोनों पहलों से स्पष्ट है कि एआई अब केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक रणनीति और आर्थिक प्रभाव का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।पैक्स सिलिका जैसे समूहों के जरिए अमेरिका सहयोगी देशों के साथ तकनीकी साझेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत भी इस समूह का सदस्य है।
पिछले कुछ महीनों में एआई को लेकर विभिन्न देशों की नीतियों में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। अमेरिका अपनी कंपनियों की तकनीकी बढ़त और कारोबारी हितों को सुरक्षित रखने पर जोर दे रहा है, जबकि चीन ओपन सोर्स मॉडल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार एआई से जुड़ी तकनीक आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति का अहम हिस्सा बन सकती है। चिप निर्माण, डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, बड़े भाषा मॉडल और एआई मॉडल तक पहुंच को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। इससे तकनीकी क्षेत्र के साथ व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।