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Investigation into foreign connection in the Jantar Mantar violence conspiracy intensifies; indications point to Pakistan and Bangladesh.
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा को जांच एजेंसियां अब सुनियोजित साजिश मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं। दिल्ली पुलिस और स्पेशल सेल की प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैठे करीब 10 विदेशी हैंडलर्स इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफार्म के जरिए लगातार सक्रिय लोगों के संपर्क में थे। जांच एजेंसियां इन इनपुट्स का तकनीकी और फोरेंसिक स्तर पर सत्यापन कर रही हैं।
जांच का केंद्र अब डिजिटल साक्ष्य बन चुके हैं। स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच को मिले इलेक्ट्रानिक प्रमाणों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हिंसा किस तरह योजनाबद्ध तरीके से भड़काई गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरी घटना का उद्देश्य देश और विदेश में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना हो सकता है।
मामले की जांच स्पेशल सेल की आइएफएसओ यूनिट को सौंपी गई है। एसीपी और इंस्पेक्टर स्तर के 10 अधिकारियों की टीम ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का फ्रेम दर फ्रेम विश्लेषण कर रही है। टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण भी किया है, ताकि हिंसा शुरू होने से पहले और उसके दौरान सक्रिय रहे लोगों की भूमिका स्पष्ट की जा सके।
जांच के दौरान कुछ संदिग्ध डिजिटल नेटवर्क और सोशल मीडिया गतिविधियां एजेंसियों के रडार पर आई हैं। प्रारंभिक इनपुट्स के अनुसार, विदेशी हैंडलर्स प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफार्म के माध्यम से लगातार संदेश भेज रहे थे। अब इन सभी गतिविधियों की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि मजबूत साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
जांच केवल वीडियो फुटेज तक सीमित नहीं है। पुलिस डंप डाटा, मैनुअल सर्विलांस और डिजिटल ट्रैकिंग की मदद से यह पता लगा रही है कि घटनास्थल से रिकॉर्ड किए गए वीडियो किस डिवाइस पर संपादित किए गए, सबसे पहले किसने उन्हें साझा किया और बाद में वे किन वाट्सएप, टेलीग्राम तथा स्नैपचैट समूहों तक पहुंचे। डिजिटल ट्रेल के आधार पर कई ऐसे अकाउंट और संपर्क सामने आए हैं, जो जांच एजेंसियों के संदेह के दायरे में हैं।
इस बीच प्रदर्शन के दौरान दर्ज 13 मुकदमों को वापस लेने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस इस मामले में वर्ष 2022 में लाल किला हिंसा से जुड़े मामलों में अपनाई गई प्रक्रिया का अध्ययन कर रही है। पुलिस ने एफआइआर वापस लेने के संबंध में कानूनी राय मांगी है और सरकार के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रही है।यदि सरकार से अनुमति मिलती है, तो पुलिस मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। दूसरा विकल्प यह भी है कि मामलों को निरस्त कराने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया जाए। फिलहाल पुलिस की कानूनी टीम सभी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा कर रही है।