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NEET paper leak: Affected families welcome reforms, say the system should be designed so that no student's future is shattered.
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले के बाद जान गंवाने वाले विद्यार्थियों के स्वजन ने केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया है। उनका कहना है कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरी सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू करना होगा, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए तेज जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों को कठोर सजा मिलना जरूरी है। उनका मानना है कि जब तक इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा पूरी तरह वापस नहीं लौटेगा।
परिजनों ने विद्यार्थियों से भी धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि असफलता जीवन का अंत नहीं होती। मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ने पर सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में जीवन से बड़ा कोई इम्तिहान नहीं होता और निराशा में कोई कठोर कदम नहीं उठाना चाहिए।
पेपर लीक से आहत होकर जान गंवाने वाले सूरत के 17 वर्षीय छात्र कहान पटेल के पिता प्रशांत कुमार पटेल ने पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कानून का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि तेज जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा से परीक्षा व्यवस्था में भरोसा मजबूत होगा और विद्यार्थियों को न्याय मिलने का विश्वास बढ़ेगा।
उत्तर प्रदेश के महराजगंज की छात्रा चंचल की मां गीता देवी ने कहा कि उनकी बेटी ने दिन रात मेहनत की थी, लेकिन पेपर लीक और दोबारा परीक्षा से जुड़ी अव्यवस्थाओं ने उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचाया। पिता अमरजीत का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और विश्वसनीय होती, तो शायद उनकी बेटी आज उनके साथ होती। उन्होंने सरकार से नई घोषणाओं को पूरी सख्ती से लागू करने की मांग की।
इंदौर में रहकर नीट की तैयारी कर रही अवंतिका मौर्य के पिता डा. बनसिंह मौर्य ने कहा कि अब आंदोलन समाप्त हो चुका है और विद्यार्थियों को पूरी एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखने की भी सलाह दी। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी को खो चुके हैं और नहीं चाहते कि कोई अन्य परिवार इस पीड़ा से गुजरे।
मध्य प्रदेश के रीवा की आकांक्षा चतुर्वेदी के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि छात्र आंदोलन के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर बेटी को डाक्टर बनाने का सपना देखा था और चाहते हैं कि भविष्य में किसी अन्य परिवार का सपना इस तरह न टूटे।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी निवासी प्रदीप माहिच की बहन बबीता ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक न हो। उन्होंने कहा कि परिवार ने प्रदीप की तैयारी के लिए जमीन तक बेच दी थी और यह उसका तीसरा प्रयास था। अब सबसे जरूरी है कि परीक्षा व्यवस्था ऐसी बने, जिस पर हर विद्यार्थी भरोसा कर सके।
लखनऊ के ऐशबाग में रहने वाले बिहार के नालंदा निवासी रेलवे कर्मचारी रंजीत अपनी 17 वर्षीय बेटी शिवानी को याद कर आज भी भावुक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के बाद उन्होंने सरकारी आवास तक छोड़ दिया। उनके अनुसार, अब चाहे कोई इस्तीफा दे या सरकार बदल जाए, उनकी बेटी वापस नहीं आएगी। यह ऐसा घाव है, जो जीवनभर नहीं भर सकेगा।