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Is the Finance Minister concerned about the stock market? – Dr. Yogendra Srivastava
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का यह बयान काबिलेगौर है कि वे कैपिटल गेन यानी पूंजीगत लाभ के बारे में सुझाव सुनने के लिये तैयार हैं। ज्ञात हो कि हर साल बजट के पहले वित्त मंत्रालय के पोर्टल पर कॉर्पोरेट, विशेषज्ञ और आम जनता से बजट सम्बन्धी सुझाव माँगे जाते हैं। इसके अलावा वित्त मंत्रालय में मीटिंग्स का दौर भी चलता है जिसमें आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के साथ बजट प्रस्तावों पर विमर्श होता है। ऐसी मीटिंग्स फिलहाल जारी हैं। गौरतलब है कि बहुत सी कम्पनियों के अच्छे तिमाही नतीजों और मुनाफे ने बढ़ोत्तरी के बावजूद शेयर बाजार लम्बी सुस्ती के दौर में हैं। विदेशी निवेशक बिकवाली करके पैसा वापस अपने देशों में निवेश कर रहे हैं जहाँ उन्हें बेहतर अवसर और ज्यादा फायदे की गुंजाइश है। सिर्फ अक्टूबर माह में विदेशी निवेशक 40 हजार करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं जो कतई अच्छा संकेत नहीं है। यह सही है कि शेयर बाजार की सेहत का असर आम नागरिक के जमा खर्च पर नहीं पड़ता लेकिन विदेशी निवेश और मजबूत शेयर बाजार किसी भी देश की आर्थिक स्थिति और भावी प्रगति का पैमाना होता है। वर्ष 1992 में शेयर बाजार की भरी उठापटक पर तत्कालीन वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था कि; "मैं शेयर बाजार के लिये अपनी नींद खराब नहीं करता"। लेकिन लगता है वर्तमान वित्तमंत्री महोदया की नींद खराब हुई है इसीलिए उन्होंने ऐसा उदार सुझाव दिया है और निवेशक बड़ी बेसब्री से सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि पहले शेयर बेचने पर होने वाले लम्बी अवधि लाभ यानी एक साल से ज्यादा अवधि के बाद बेचने पर कैपिटल गेन पर पूरी टैक्स छूट थी। लेकिन 1 अप्रैल 2018 से इसे 10 प्रतिशत और बाद में 2024 से बढ़ा कर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया। दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने शेयर पर मिलने वाले लाभांश को भी नहीं छोड़ा और 2020 से उस पर भी टैक्स लगा दिया गया जबकि पहले लाभांश पर कम्पनी टैक्स देती थी और इन्वेस्टर को प्राप्त होने वाला लाभांश पूर्णतः कर मुक्त था। लाभांश पर टैक्स वास्तव में टैक्स पर टैक्स है क्योंकि कम्पनियां पहले ही कई तरह के टैक्स दे चुकी होती हैं जिनमें मुनाफे पर टैक्स भी शामिल होता है।
पहले शेयर बाजार केवल रईस लोगों का शौक समझा जाता था मगर अब स्थितियां बदल चुकी हैं। पिछले 10 सालों में निवेशकों की संख्या में 10 गुना बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2015 में देश में डीमेट खातों की संख्या लगभग 2.5 करोड़ थी जो 2026 तक 25 करोड़ से अधिक हो चुकी है। नौकरीपेशा लोग आम तौर पर फिक्स डिपॉजिट में निवेश किया करते थे लेकिन लगातार घटती ब्याज दरों के कारण लोग निवेश के दूसरे रास्ते अपनाने पर मजबूर हैं ताकि बढ़ती हुई महंगाई और मुद्रास्फीति का मुकाबला कर सकें। निवेशकों की तादाद में वृद्धि का एक कारण यह भी है कि शेयर बाजार का कारोबार पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल होने से निवेश बहुत सुविधाजनक हो गया है और घर बैठे मोबाइल के जरिये सारे लेनदेन करना भी बिल्कुल आसान है। इसीलिए अब नौकरीपेशा और रिटायर होने वाले नागरिक केवल फिक्स डिपॉजिट में निवेश पर भरोसा नहीं करते हैं बल्कि शेयर बाजार और म्यूचुअल फण्ड में भी निवेश करते हैं। इसलिए कैपिटल गेन पर टैक्स का असर उस मध्यम वर्ग पर पड़ता है जो कम होती ब्याज दर से बेहतर रिटर्न की उम्मीद में शेयर बाजार और म्यूचुअल फण्ड में निवेश करता है। यह समझ से परे है कि एक तरफ सरकार निवेश को बढ़ावा देने की बात करती है लेकिन दूसरी तरफ निवेश से होने वाली हर तरह की आय पर टैक्स लगा देती है। मध्यवर्ग द्वारा शेयर बाजार में निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन सरकार की निवेश विरोधी नीतियों से शेयर बाजार का माहौल तो खराब हुआ है। साथ ही आम नागरिकों के आय के साधन इतने सीमित हो गये हैं कि वे बढ़ती महंगाई और मुद्रास्फीति का मुकाबला ही नहीं कर पाते।
देश का उच्चवर्ग तो आर्थिक नीतियों से अप्रभावित रहता है क्योंकि व्यापार या उद्योग में नफा नुकसान का उनके व्यक्तिगत जीवन पर कोई असर नहीं पड़ता। निम्न वर्ग भी लाड़ली बहना, फ्री एलपीजी, फ्री राशन और तरह तरह के लोक लुभावन कार्यक्रमों से लाभान्वित है। लेकिन मध्यवर्ग की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं क्योंकि वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स दोनों की मार झेलने पर मजबूर है। इसलिए जरूरी है कि वित्तमंत्री महोदया न सिर्फ कैपिटल गेन बल्कि लाभांश और ब्याज पर टैक्स के बारे में भी पुनर्विचार करें। उन्हें यह समझना चाहिये कि शेयर बाजार में निवेशकों को घाटा भी झेलना पड़ता है और लगातार गिरती ब्याज दरें अब महंगाई का मुकाबला नहीं कर सकतीं। वैसे बजट पूर्व सुझाव तो वित्तमंत्री को बदस्तूर हर साल सुनने मिलते हैं लेकिन जब तक वे आम लोगों की तकलीफ नहीं समझेंगी तब कोई सुधार नहीं करेंगीं। जनता सिर्फ उम्मीद कर सकती है कि वित्तमंत्री महोदया शेयर बाजार की फ़िक्र करेंगी वरना हर साल की तरह एक और बजट आयेगा और लोगों को निराश कर जायेगा।
-- डॉ योगेन्द्र श्रीवास्तव- जबलपुर