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Land records are in a mess? Owners' names have changed overnight, raising serious questions about the digital system.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में डिजिटल भू-अभिलेखों की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से जुड़े ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जमीन का रकबा और भू-स्वामियों के नाम कथित तौर पर बिना वैधानिक आदेश के बदल गए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि शिकायत होने के बाद रिकॉर्ड फिर से पुराने स्वरूप में लौट आए।इन घटनाओं ने भुइयां पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन पर नई बहस छेड़ दी है।
रायपुर में जमीन का रकबा और नाम बदलने का मामला
रायपुर के उरकुरा स्थित खसरा नंबर 78/1 में दर्ज 0.005 हेक्टेयर भूमि का रकबा अचानक बढ़कर 0.0079 हेक्टेयर हो गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि रिकॉर्ड में दर्ज कुछ नाम हटाकर किसी अन्य व्यक्ति का नाम प्रदर्शित होने लगा।मामले की शिकायत दर्ज होने के अगले ही दिन रिकॉर्ड दोबारा पुराने स्वरूप में दिखाई देने लगा, जिससे संदेह और गहरा गया।
कबीरधाम में भी सामने आई गड़बड़ी
इसी तरह कबीरधाम जिले के छिरहा गांव में खसरा नंबर 21/4 का रकबा 0.128 हेक्टेयर से बढ़कर 0.228 हेक्टेयर दर्ज हो गया था। शिकायत के बाद कुछ दिनों के भीतर रिकॉर्ड को फिर से पहले वाली स्थिति में कर दिया गया।शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि रकबे में बदलाव कर जमीन के लेनदेन या आर्थिक लाभ की कोशिश की जा सकती थी।
765 एकड़ जमीन निजी नाम पर दर्ज होने का मामला भी आया था सामने
राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी का सबसे बड़ा मामला दुर्ग जिले के मुरमुंदा क्षेत्र में सामने आया था। यहां 765 एकड़ से अधिक शासकीय और निजी भूमि कथित तौर पर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज होने का मामला उजागर हुआ था।इस घटना के बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए थे।
तकनीकी सेंध या सिस्टम से छेड़छाड़?
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया से किए गए। यदि बदलाव वैध नहीं थे तो उन्हें किसने किया और यदि वैध थे तो बाद में रिकॉर्ड को वापस क्यों बदला गया।राजस्व विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि कहीं सिस्टम में तकनीकी खामी है या फिर डिजिटल रिकॉर्ड के साथ सुनियोजित छेड़छाड़ की जा रही है।
जांच के आदेश, कार्रवाई के संकेत
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताते हुए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जांच कराने की बात कही है। विभाग का कहना है कि यदि बिना वैधानिक प्रक्रिया के रिकॉर्ड में बदलाव पाया गया तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
सरकार जमीन संबंधी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए लगातार डिजिटलीकरण को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में रिकॉर्ड में बदलाव और फिर उसे वापस किए जाने जैसी घटनाएं आम लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।