

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Latest News: Rajesh Exports faces SEBI action, accused of revenue manipulation of Rs 15 lakh crore
नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी कंपनी चलाने वाली भारतीय कंपनी Rajesh Exports Limited गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में घिर गई है। मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने कंपनी और उसके चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर Rajesh Mehta के खिलाफ अंतरिम एकतरफा आदेश जारी किया है। कंपनी पर करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में कथित हेरफेर, फंड के गलत इस्तेमाल और निवेशकों को भ्रामक जानकारी देने के आरोप लगे हैं।
सेबी के 109 पन्नों के अंतरिम आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने कई वर्षों तक वित्तीय आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नियामक के मुताबिक, कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के कुल रेवेन्यू को गलत तरीके से दिखाया, जो उसके घोषित कुल राजस्व का करीब 99.80 प्रतिशत है।
सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने गैर-प्रामाणिक लेनदेन दर्ज किए, खातों के समेकन में अनियमितताएं बरतीं और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के कुछ फंड कथित तौर पर राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के व्यक्तिगत बैंक खातों के जरिए भेजे गए। सेबी के अनुसार, इन लेनदेन के लिए आवश्यक मंजूरी और खुलासा नहीं किया गया था।
नियामक ने इसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।
सेबी ने कहा कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के डेरिवेटिव सौदों को कारोबार की आय के रूप में दर्ज किया। इसके अलावा विदेशी मुद्रा विनिमय से हुए लाभ और निवेश से प्राप्त ब्याज आय को भी परिचालन आय में शामिल किया गया।
इससे कंपनी का वास्तविक कारोबार कहीं अधिक बड़ा दिखाया गया, जिससे निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर भ्रमित किया गया।
कंपनी ने जांच के दौरान अफ्रीका में सोने की खदानों में निवेश का दावा किया था। हालांकि सेबी को उपलब्ध दस्तावेजों में इस निवेश की पुष्टि नहीं मिली। नियामक ने इस दावे पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
सेबी ने कहा कि जांच के दौरान कंपनी ने कई अहम जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं और अलग-अलग समय पर विरोधाभासी जवाब दिए। इसे जांच में सहयोग न करने की श्रेणी में रखा गया है।
राजेश एक्सपोर्ट्स वर्ष 2015 में लगभग 400 मिलियन डॉलर में स्विट्जरलैंड स्थित एक बड़ी गोल्ड रिफाइनरी के अधिग्रहण के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थी। कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों में गिना जाता है। हालांकि अब उसके वित्तीय रिकॉर्ड और कारोबारी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।