

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Latest News: The ₹40,000 crore Next Generation Corvette project may soon be approved; the Indian Navy will receive eight state-of-the-art warships.
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को नई धार देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 40 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही भारतीय नौसेना को आठ अत्याधुनिक युद्धपोतों का शक्तिशाली बेड़ा मिलेगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक बढ़त और मजबूत होगी।
सूत्रों के मुताबिक सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Garden Reach Shipbuilders & Engineers सबसे कम बोलीदाता (L1) के रूप में सामने आई है और उसे पांच कॉर्वेट बनाने का ठेका मिल सकता है। वहीं बाकी तीन युद्धपोतों का निर्माण Goa Shipyard Limited द्वारा किए जाने की संभावना है।
करीब 3,500 टन विस्थापन वाले इन युद्धपोतों को “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” अवधारणा के तहत विकसित किया जा रहा है। आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद ये जहाज लंबी दूरी तक सटीक और घातक हमला करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति 32 नॉट्स होगी और ये लगभग 30 दिनों तक बिना बाहरी सहायता के समुद्र में तैनात रह सकेंगे।
इन कॉर्वेट्स की सबसे बड़ी ताकत इनकी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली होगी। प्रत्येक युद्धपोत पर 8 एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जो लंबी दूरी तक बेहद सटीक हमला करने में सक्षम हैं।
हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए जहाजों में 16 से 32 वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (VLS-SR SAM) सेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों जैसे नजदीकी खतरों को निष्क्रिय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इन युद्धपोतों को अत्याधुनिक पनडुब्बी-रोधी तकनीकों से लैस किया जाएगा। इनमें हल-माउंटेड सोनार, एक्टिव टोव्ड ऐरे सोनार और ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो लॉन्चर शामिल होंगे, जिससे समुद्र के भीतर छिपे दुश्मनों की पहचान और उन पर हमला करना आसान होगा।
साथ ही ये युद्धपोत HAL Dhruv और Sea King जैसे मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों का संचालन भी कर सकेंगे, जिससे निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
नई पीढ़ी के इन कॉर्वेट्स में ELM-2248 MF-STAR AESA रडार, VARUNA ESM, SHAKTI इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और उन्नत लक्ष्य-ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ये प्रणालियां दुश्मन की मिसाइलों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक हमलों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यदि CCS से 2026 में मंजूरी मिल जाती है, तो उसी वर्ष निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इसके बाद 2027 में डिजाइन और स्टील कटिंग के साथ निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
योजना के मुताबिक पहला कॉर्वेट 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है और 2031-32 तक भारतीय नौसेना में शामिल हो सकता है। बाकी सात युद्धपोत 2032 से 2036 के बीच चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे।