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Lost a leg, not his spirit: Balod's Teman wins gold in archery.
रायपुर। जिंदगी ने बालोद के टेमन कुमार के सामने मुश्किल हालात खड़े किए, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने खेल के मैदान में हिम्मत नहीं छोड़ी और तीरंदाजी को अपना जुनून बना लिया। अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में टेमन ने पुरुष कंपाउंड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।टेमन कुमार ने श्याम सुंदर स्वामी के साथ मिलकर कंपाउंड टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने ईराक की जोड़ी को 152-139 के अंतर से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ टेमन ने एक बार फिर साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत भारतीय जोड़ी के लिए आसान नहीं रही। शुरुआती चरण में टेमन और श्याम सुंदर स्वामी की जोड़ी कुछ अंकों से पीछे थी, लेकिन दोनों तीरंदाजों ने संयम बनाए रखा। अगले राउंड में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए बढ़त हासिल कर ली।इसके बाद भारतीय जोड़ी ने लगातार बेहतर निशाने लगाए और मुकाबले पर पकड़ मजबूत कर ली। अंतिम चरण में टेमन और श्याम सुंदर स्वामी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 अंकों के अंतर से मुकाबला जीत लिया।
टेमन कुमार की उपलब्धियां केवल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं हैं। वे वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पुरुष कंपाउंड ओपन वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा अप्रैल 2026 में बैंकॉक में हुई पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में भी उन्होंने हिस्सा लिया था।नवंबर 2023 से टेमन सीआईआरएफ पैरा तीरंदाजी की केंद्रीय टीम में चयन के लिए अभ्यास कर रहे हैं। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
बालोद जिले के रहने वाले टेमन ने वर्ष 2022 में तीरंदाजी की शुरुआत की थी। पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने खेल को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार प्रशिक्षण के जरिए खुद को मजबूत किया। शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा।टेमन की कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो किसी शारीरिक चुनौती या विपरीत परिस्थिति के कारण अपने सपनों से पीछे हटने लगते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद टेमन कुमार का लक्ष्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए और बड़ी उपलब्धियां हासिल करना है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। उनका सफर यह संदेश देता है कि हौसला मजबूत हो तो जिंदगी की बड़ी से बड़ी चुनौती को भी उपलब्धि में बदला जा सकता है।