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Madhya Pradesh court gives green light to DNA test to prove wife's infidelity, truth can no longer be hidden
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम निर्णय देते हुए कहा है कि यदि किसी मामले में पत्नी के व्यभिचार (अडल्टरी) को साबित करना उद्देश्य है, तो बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाना उचित माना जाएगा। जस्टिस विवेक जैन ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को कायम रखा, जिसमें बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए गए थे।
बच्चे की निजता और हित
पत्नी ने तर्क दिया कि डीएनए टेस्ट से बच्ची की निजता प्रभावित होगी और यह उसके हितों के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि इस परीक्षण का उद्देश्य सिर्फ पत्नी के व्यभिचार को साबित करना है, न कि बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने का।
फैमिली कोर्ट का फैसला सही
हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने सही निर्णय लिया। डीएनए परीक्षण करवाने से सच्चाई की तह तक पहुंचा जा सकेगी। कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि कन्वेंशन के तहत बच्चे के निजता, स्वायत्तता और पहचान के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।