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Mahadev App Scam: CBI to reach those providing protection by questioning Saurabh Chandrakar
रायपुर। करीब छह हजार करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने सट्टा सिंडिकेट को संरक्षण देने के बदले कथित तौर पर अवैध रकम हासिल की थी। एजेंसी गिरफ्तार आरोपी सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के जरिए छत्तीसगढ़ के ऐसे सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की पहचान करना चाहती है।सीबीआई ने रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल रिमांड याचिका में चंद्राकर की 10 दिन की हिरासत मांगी थी। एजेंसी का कहना था कि उससे विस्तार से पूछताछ किए बिना सट्टेबाजी नेटवर्क, उसके आर्थिक लेनदेन और उसे कथित संरक्षण देने वालों की भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकेगी। हालांकि, बुधवार को अदालत ने ओमान से प्रत्यर्पित चंद्राकर को आठ दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
सीबीआई के मुताबिक, महादेव ऐप से जुड़ी अवैध कमाई को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने के लिए हवाला ऑपरेटरों का सहारा लिया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भी भूमिका थी। उनके जरिए कथित तौर पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली राजनीतिक लोगों तक नियमित रूप से बड़ी रकम पहुंचाई जाती थी। इस भुगतान का मकसद सट्टेबाजी के कारोबार को निर्बाध रूप से चलाने के लिए संरक्षण हासिल करना था।
जांच एजेंसी का मानना है कि चंद्राकर से पूछताछ में उन सरकारी अधिकारियों के नाम और भूमिका सामने आ सकते है, जिन्होंने कथित तौर पर महादेव सट्टेबाजी सिंडिकेट को काम करने देने के बदले अवैध भुगतान लिया। सीबीआई इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि किस स्तर पर कितनी रकम दी गई और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर महादेव बुक ऐप का प्रचार किया। पैनल और शाखा संचालकों के नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार फैलाया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस अवैध कारोबार से होने वाली कुल कमाई का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा ऐप के प्रमोटर अपने पास रखते थे। बाकी रकम पैनल संचालकों के बीच बांटी जाती थी।
सीबीआई चंद्राकर से कथित धोखाधड़ी के जरिए जुटाई गई रकम के संग्रह और उसके बंटवारे से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल करेगी। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि अवैध कमाई किस तरह अलग-अलग स्तरों पर पहुंचाई गई, कितनी रकम विदेश भेजी गई और उससे किन संपत्तियों का निर्माण या अधिग्रहण किया गया। जांच का एक अहम हिस्सा इस पूरे आर्थिक नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की पहचान करना है।