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The festival of lights begins today with Dhanteras; this year, the Diwali celebrations will span six days.
रायपुर। धनतेरस के साथ शुक्रवार, 6 नवंबर से दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। आमतौर पर पांच दिन चलने वाला दीपावली का पर्व इस बार छह दिनों तक मनाया जाएगा। इसकी मुख्य वजह अमावस्या तिथि का दो दिन तक रहना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इसी कारण दीपावली के बाद होने वाले पर्वों की तारीखों में भी बदलाव हुआ है।7 नवंबर को त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का संयोग रहेगा। इस दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसके बाद 8 नवंबर को दीपावली और महालक्ष्मी पूजन होगा। 9 नवंबर को दोपहर तक अमावस्या तिथि रहने के कारण सोमवती अमावस्या का स्नान और दान किया जाएगा। इसके चलते गोवर्धन पूजा 10 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी।
धनतेरस पर शुक्रवार सुबह 10:30 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। ऐसे में शाम के प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार, करीब 50 साल बाद इस दिन पांच विशेष योग एक साथ बन रहे है। इनमें अमृत योग, बुधादित्य योग, महालक्ष्मी योग, हंस राज योग और गुरु-केतु योग शामिल है।इन शुभ संयोगों में सोना-चांदी, वाहन और संपत्ति की खरीदारी को फलदायी माना गया है। धनतेरस पर बेहतर स्वास्थ्य की कामना से भगवान धन्वंतरि की पूजा, आर्थिक समृद्धि के लिए कुबेर पूजन और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए शाम को यम दीपदान करने की परंपरा है।
शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी दंडी स्वामी इंदुभवानंद तीर्थ महाराज के अनुसार, इस साल दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 10:51 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को सुबह 11:32 बजे तक रहेगी। इस दौरान स्वाति नक्षत्र भी पूरे दिन रहेगा।
वृषभ लग्न यानी प्रदोष काल: शाम 5:49 बजे से रात 7:55 बजे तक। इस अवधि में लक्ष्मी पूजन को मुख्य और विशेष फलदायी माना गया है।
सिंह लग्न यानी महानिशीथ काल: रात 12:27 बजे से 2:41 बजे तक। यह समय विशेष रात्रि पूजन और अलक्ष्मी तथा दरिद्रता से मुक्ति की कामना के लिए शुभ माना जाता है।
मंत्र सिद्धि काल: शाम 5:49 बजे से रात 2:41 बजे तक। मंत्र साधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह अवधि महत्वपूर्ण रहेगी।
8 नवंबर को शाम के प्रदोष काल और रात में अमावस्या तिथि रहने के कारण दीपावली इसी दिन मनाई जाएगी। अगले दिन 9 नवंबर को सुबह 11:32 बजे तक अमावस्या रहने से सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा।अमावस्या तिथि के दो दिन तक रहने से त्योहारों का क्रम भी आगे बढ़ गया है। 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन होगा, जबकि 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी।
पिछले कुछ सालों से दीपोत्सव छह दिनों तक चल रहा है। साल 2021 में आखिरी बार पांच दिन का दीपावली पर्व मनाया गया था। उस साल 2 नवंबर को धनतेरस से शुरुआत हुई और 6 नवंबर को भाई दूज के साथ उत्सव पूरा हुआ था।2022 में दीपावली के अगले दिन सूर्य ग्रहण पड़ने के कारण गोवर्धन पूजा की तारीख आगे बढ़ गई थी। इसके बाद से लगातार छह दिन का दीपोत्सव मनाया जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 2027 में फिर से दीपोत्सव पांच दिनों का होगा।
दृक पंचांग और खगोलीय गणनाओं के मुताबिक, अगले दस वर्षों में दो बार दीपोत्सव का समय घटकर चार दिन रह सकता है। वर्ष 2029 में 5 नवंबर और 2032 में 2 नवंबर को चंद्रमा की तेज गति के कारण तिथि क्षय की स्थिति बनने का अनुमान है। इसके चलते रूप चौदस यानी छोटी दिवाली और दीपावली एक ही तारीख पर पड़ सकती है।