

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Major ED action against Rajesh Exports; raids conducted at multiple locations in Bengaluru.
बेंगलुरु। देश की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स एक बार फिर चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बेंगलुरु स्थित कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और फंड फ्लो से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। हालांकि, ED की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
माना जा रहा है कि ED की यह कार्रवाई भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की हालिया अंतरिम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर की जा रही है। SEBI ने कंपनी, उसके चेयरमैन राजेश मेहता और कुछ संबंधित संस्थाओं पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।
SEBI के अनुसार, कंपनी ने कई संबंधित संस्थाओं के माध्यम से जटिल वित्तीय लेनदेन किए, जिससे पैसों के वास्तविक स्रोत और प्राप्तकर्ता की पहचान करना कठिन हो गया। नियामक का दावा है कि इन लेनदेन की संरचना इस तरह बनाई गई थी कि फंड ट्रेल को जानबूझकर छिपाया जा सके।
SEBI ने अपने आदेश में कहा है कि कंपनी अपने दावों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज, जैसे लोन एग्रीमेंट, बोर्ड की मंजूरी और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकी। इससे कंपनी की अकाउंटिंग प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2020 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने प्रमोटर राजेश मेहता को करीब 338.90 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि बदले में केवल 232.44 करोड़ रुपये ही वापस प्राप्त हुए। इस अंतर को लेकर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं।
SEBI ने कंपनी के वित्तीय विवरणों में लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये तक की कथित वित्तीय गलत बयानी (Financial Misstatement) का आरोप लगाया है। नियामक का कहना है कि कुछ लेनदेन को कई बार रिकॉर्ड कर राजस्व और खरीद के आंकड़ों को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर दिखाया गया।
हालांकि, SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह राशि वास्तविक नकदी प्रवाह (Cash Flow) नहीं है, बल्कि कथित रूप से गलत तरीके से दर्ज की गई अकाउंटिंग एंट्रीज का कुल मूल्य है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप किसी भी सूचीबद्ध कंपनी की साख और निवेशकों के भरोसे पर असर डाल सकते हैं। भारतीय ज्वेलरी उद्योग की प्रमुख कंपनियों में शामिल राजेश एक्सपोर्ट्स के लिए यह मामला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब ED की जांच के बाद यदि मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य वित्तीय अपराधों से जुड़े सबूत सामने आते हैं, तो कंपनी की कानूनी और कारोबारी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल, निवेशकों और बाजार की नजर जांच की प्रगति तथा कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।