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Major ED action in the alleged ₹3,200 crore liquor scam: Congress leader Ramgopal Agarwal arrested; accused of accepting a commission of ₹52 crore.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3,200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत हुई इस कार्रवाई के बाद अदालत ने उन्हें पूछताछ के लिए पांच दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि कथित घोटाले से जुड़े लेनदेन में रामगोपाल अग्रवाल को 52 करोड़ रुपये का कमीशन मिला, जिसे विभिन्न माध्यमों से निवेश किया गया।
इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) भी रामगोपाल अग्रवाल को कोल लेवी और शराब घोटाला मामलों में गिरफ्तार कर चुकी है। करीब तीन वर्षों तक फरार रहने के बाद उन्होंने 8 जुलाई को EOW के समक्ष सरेंडर किया था। अब इन्हीं मामलों में ED ने भी उन्हें गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है।
गिरफ्तारी के बाद ED ने रामगोपाल अग्रवाल को विशेष अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड मांगी। अदालत ने एजेंसी की दलीलों को स्वीकार करते हुए पांच दिन की रिमांड मंजूर कर दी। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अदालत पहुंचे और रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात कर उनसे चर्चा की।
रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ EOW और ED दोनों ने कोल लेवी, कस्टम मिलिंग और शराब घोटाले से जुड़े तीन-तीन प्रकरण दर्ज किए हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उनकी भूमिका कथित तौर पर राजनीतिक फंडिंग के लिए धन जुटाने और उसे दिल्ली तक पहुंचाने की थी। फिलहाल 52 करोड़ रुपये के कथित कमीशन का मामला जांच के दायरे में है, जबकि अन्य मामलों में धन के प्रवाह और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल जारी है।
ED के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य में शराब कारोबार के दौरान एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क में कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों और प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका रही। अब तक ED इस मामले में छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें 81 आरोपितों के नाम शामिल हैं।
इस प्रकरण में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू और समीर विश्नोई, सेवानिवृत्त IAS अनिल टुटेजा, निरंजन दास, अरुणपति त्रिपाठी, सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है। इनमें से कई को विभिन्न चरणों में अदालत से जमानत मिल चुकी है, जबकि जांच अभी भी जारी है।