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Major High Court ruling: Path cleared for the repatriation of two Uzbek female citizens; deportation to take place soon.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दो उज्बेकिस्तान की महिला नागरिकों को उनके देश वापस भेजने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास सहित सभी पक्ष डिपोर्टेशन (प्रत्यावर्तन) के पक्ष में हैं, ऐसे में मामले में आगे विचार करने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों महिलाओं को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सभी पक्षों की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए डिपोर्टेशन का रास्ता साफ कर दिया।
मामले में उज्बेकिस्तान दूतावास ने अदालत से अनुरोध किया था कि दोनों महिलाओं की स्वदेश वापसी के लिए आवश्यक निर्देश जल्द जारी किए जाएं। अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित एजेंसियां प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया तेज करेंगी।
जानकारी के अनुसार करीब पांच महीने पहले रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो उज्बेक महिला नागरिकों को हिरासत में लिया था। जांच के दौरान उनके भारत में रहने से संबंधित दस्तावेजों और वैधता को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया था।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में रायपुर केंद्रीय जेल में दो उज्बेक महिलाओं सहित कुल 10 विदेशी नागरिक बंद हैं। इनमें विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनके खिलाफ वीजा नियमों के उल्लंघन और विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित विभाग यात्रा दस्तावेजों की व्यवस्था, पहचान सत्यापन और दूतावास के साथ समन्वय जैसी औपचारिकताएं पूरी करेंगे। प्रक्रिया पूरी होते ही दोनों महिलाओं को उनके देश उज्बेकिस्तान भेज दिया जाएगा।