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Major relief in the CGPSC 2021 recruitment case... Supreme Court verdict paves the way for the appointment of innocent candidates.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा-2021 से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया, जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद सीबीआई जांच में निर्दोष पाए गए अभ्यर्थियों की सशर्त नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
CGPSC ने 26 नवंबर 2021 को विभिन्न विभागों में 171 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 11 मई 2023 को अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता और भाई-भतीजावाद के आरोप सामने आए, जिसके चलते पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
भर्ती में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। जांच लंबित रहने के दौरान चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई थी।
29 जुलाई 2025 को हाई कोर्ट की एकल पीठ ने आदेश दिया था कि जिन चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई जांच में कोई प्रतिकूल साक्ष्य नहीं मिले हैं, उन्हें 60 दिनों के भीतर सशर्त नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। राज्य सरकार ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।
डिवीजन बेंच के फैसले के बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही सीबीआई जांच में दागी नहीं पाए गए अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।