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Major revelation in NEET paper leak, CBI questions doctor for leaking papers for son
नई दिल्ली। देशभर में सुर्खियों में रहे नीट पेपर लीक मामले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने महाराष्ट्र के लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरूरे से लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसी को शक था कि उन्होंने अपने बेटे के लिए लीक हुआ नीट पेपर हासिल करने की कोशिश की थी।CBI ने पूछताछ के बाद डॉ. शिरूरे को सरकारी गवाह बना लिया है। उन्हें पुणे स्थित CBI कार्यालय में बुलाया गया था, जहां देर रात तक उनसे सवाल-जवाब हुए।
पेपर सेटर और आरोपी प्रोफेसर से जुड़े थे तार
जांच एजेंसी को शक था कि डॉ. शिरूरे के संबंध नीट पेपर लीक केस के आरोपी डॉ. मनोज शिवराज मोटेगांवकर से थे। इसके अलावा उनके संपर्क नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के पेपर सेटर प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी से भी बताए जा रहे हैं।मोटेगांवकर और कुलकर्णी दोनों पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसी वजह से CBI का संदेह और गहरा हो गया था।
CBI जांच में बड़ा दावा, 5 राज्यों में बिका था पेपर
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक अब तक की पड़ताल में सामने आया है कि नीट का प्रश्नपत्र पांच राज्यों में बेचा गया था। इसमें सबसे ज्यादा नेटवर्क महाराष्ट्र में सक्रिय था, जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान का नाम सामने आया है।CBI अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल डिवाइस की जांच के बाद कई अहम सुराग मिले हैं। एजेंसी ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
NTA ने कहा – हमारे सिस्टम से पेपर लीक नहीं हुआ
इधर नीट विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह गुरुवार को संसदीय समिति के सामने पेश हुए। करीब पांच घंटे चली बैठक में परीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा चूक को लेकर उनसे सवाल पूछे गए।अभिषेक सिंह ने समिति को बताया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुआ था। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों की भी जानकारी दी।
निजी स्कूलों को लेकर शिक्षा मंत्रालय का बड़ा स्पष्टीकरण
इस बीच शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी यानी SMC को लेकर भी बड़ा बयान जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में SMC गाइडलाइन अनिवार्य रूप से लागू नहीं होगी।यह छूट उन स्कूलों को मिलेगी जिन्हें सरकार या स्थानीय निकाय से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिलती। हालांकि मंत्रालय ने निजी स्कूलों को पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए स्वेच्छा से स्कूल मैनेजमेंट कमेटी बनाने की सलाह दी है।