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Major revelation in the Tvisha Sharma death case: CBI obtains alleged call recording of mother-in-law and husband; voice samples and iPhone data to unlock the truth.
भोपाल। ग्रेटर नोएडा की मॉडल एवं अभिनेत्री रही त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में हुई मौत के मामले में सीबीआई ने एम्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर इसे आत्महत्या माना है। जांच एजेंसी ने बीते सोमवार को भोपाल कोर्ट में 636 पेज का आरोपपत्र पेश किया। हालांकि, मामले में जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सीबीआई के हाथ लगी एक कथित फोन रिकॉर्डिंग और मोबाइल डेटा की जांच से कई नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
सीबीआई को कथित तौर पर ऐसी फोन रिकॉर्डिंग मिली है, जिसमें त्विषा को लेकर उसके पति समर्थ सिंह और उसकी मां, सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह के बीच बातचीत होने की बात सामने आई है। रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाजों की पुष्टि के लिए सीबीआई ने दोनों आरोपितों के वॉयस सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजे हैं। आवाजों की फॉरेंसिक जांच के बाद इस रिकॉर्डिंग की वास्तविकता स्पष्ट होगी।
आरोपपत्र में सीबीआई ने भोपाल कोर्ट को बताया है कि त्विषा के आईफोन और एक बेसिक फोन से बरामद होने वाला डेटा मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है। एजेंसी को आशंका है कि डिजिटल डेटा की जांच से आरोपितों के अलावा कुछ अन्य लोगों की भूमिका या नए गवाहों के बारे में भी जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल फोन का डेटा पूरी तरह रिकवर होकर सीबीआई को प्राप्त नहीं हुआ है। इसके मिलने के बाद जांच की दिशा में और बदलाव संभव है।
सीबीआई ने आरोपितों के घर से बरामद सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को भी प्रयोगशाला भेजा है। एजेंसी इसकी जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं रिकॉर्डिंग या डेटा के साथ छेड़छाड़ तो नहीं की गई। यदि किसी तरह की छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो इस पहलू पर अलग से जांच आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा त्विषा, उसके भाई हर्षित शर्मा और पति समर्थ सिंह के मोबाइल फोन भी डेटा रिकवरी के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
त्विषा शर्मा की 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच कटारा हिल्स थाना पुलिस ने की थी। इसके बाद 25 मई को मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। 28 मई को करीब आठ घंटे की पूछताछ के बाद सीबीआई ने त्विषा की सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया था। दो जून से गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
मामले के आरोपपत्र का अध्ययन कर चुके अधिवक्ताओं ने एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु की ओर ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार, विस्तृत आरोपपत्र में घटना के बाद समर्थ सिंह के लापता होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। 13 मई को एफआईआर दर्ज होने और जमानत आवेदन निरस्त होने के बाद समर्थ कई दिनों तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहा था। बाद में पुलिस ने उसे 21 मई को जबलपुर हाईकोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया था। अब आरोपपत्र में इस अवधि के संबंध में स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीबीआई की मौजूदा जांच में आत्महत्या का निष्कर्ष सामने आया है, लेकिन फोन रिकॉर्डिंग, मोबाइल डेटा और सीसीटीवी डीवीआर की फॉरेंसिक जांच अभी बाकी है। इन डिजिटल साक्ष्यों से यदि कोई नया तथ्य सामने आता है तो सीबीआई पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। ऐसे में त्विषा की मौत से जुड़े मामले में आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।