

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Major shift following 22 death penalty verdicts: 100 cases withdrawn from Judge Ravi Kumar's court.
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर इन दिनों चर्चा में हैं। पिछले पांच माह के दौरान उन्होंने हत्या के नौ मामलों में महिला समेत 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। उनकी सख्त सजा के चलते न्यायिक क्षेत्र में उनका नाम लगातार सुर्खियों में रहा है।
इसी बीच जिला जज बीरेन्द्र कुमार सिंह ने न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत में विचाराधीन लूट और हत्या से जुड़े करीब 100 मामलों को वापस ले लिया है। अब इन मुकदमों की सुनवाई सत्र न्यायालय में की जाएगी। हालांकि, उनकी अदालत में अभी भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।
जानकारी के अनुसार, न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत में करीब 1,000 पत्रावलियां विचाराधीन हैं। इनमें रुड़की के कुख्यात बदमाश चैनू पंडित से जुड़ी पत्रावली भी शामिल है। इस मामले में बुधवार को सुनवाई प्रस्तावित थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में हत्या से जुड़े कई मामलों में साक्ष्यों को लेकर सुनवाई चल रही थी।
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर इससे पहले ज्ञानवापी सर्वे का आदेश देने के कारण भी चर्चा में आए थे। आदेश के बाद उन्हें हत्या की धमकी मिली थी। इसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
रवि कुमार दिवाकर वर्ष 2009 में न्यायिक सेवा में आए थे। करीब 17 वर्षों के न्यायिक कार्यकाल के दौरान वह संभल, बरेली और मुजफ्फरनगर में अब तक 35 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। उनके फैसलों में गंभीर आपराधिक मामलों में कड़ी सजा देने की छाप देखने को मिली है।
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का 29 नवंबर 2025 को बरेली से स्थानांतरण होकर मुजफ्फरनगर आगमन हुआ था। इसके बाद से हत्या और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में उनके कई फैसले चर्चा में रहे हैं। अब उनकी अदालत से 100 लूट और हत्या के मामलों को वापस लिए जाने के बाद इन मुकदमों की आगे की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी।