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The soil of Jharkhand has unlocked the door to one of life's oldest mysteries... concrete evidence of microbial life found in 3.5-billion-year-old rocks.
जमशेदपुर। जमशेदपुर के पास भीतरदाढ़ी गांव में मिले प्राचीन चट्टानी नमूनों ने पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा दी है। शोधकर्ताओं को करीब 3.5 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में ऐसे रासायनिक और संरचनात्मक प्रमाण मिले हैं, जो उस दौर में सूक्ष्मजीवी जीवन की मौजूदगी की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं।
पूर्वी सिंहभूम जिले में जमशेदपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर सुंदरनगर के पास भीतरदाढ़ी क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण खोज हुई है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़ी विज्ञानी त्रिस्रोता चौधरी के नेतृत्व में भारत, यूरोप और अमेरिका के शोधकर्ताओं की टीम ने चट्टानों का विस्तृत अध्ययन किया।इस शोध को अमेरिका की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है।शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने सिलिका से भरपूर चर्ट चट्टानों में मौजूद असामान्य काली और सफेद धारियों का अध्ययन किया। वर्ष 2014 में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान इन संरचनाओं पर पहली बार ध्यान गया था।
वैज्ञानिकों ने लेजर रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी और कार्बन प्रोफाइल के जरिए इन चट्टानों की जांच की। विश्लेषण से संकेत मिला कि काली धारियां सामान्य भूवैज्ञानिक संरचना नहीं हैं, बल्कि प्राचीन माइक्रोबियल मैट यानी सूक्ष्मजीवों की परतों के जीवाश्म अवशेष हो सकती हैं।प्रयोगशाला परीक्षण में चट्टानों की उम्र करीब 3.497 अरब वर्ष निर्धारित की गई। इस प्रत्यक्ष काल निर्धारण ने शोध को विशेष महत्व दिया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 3.5 अरब वर्ष पहले आज का भीतरदाढ़ी क्षेत्र समुद्री वातावरण के भीतर था। उस समय यहां ज्वालामुखीय गतिविधियां भी सक्रिय रही होंगी।गर्म पानी और खनिजों से भरपूर वातावरण शुरुआती सूक्ष्मजीवों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध करा सकता था। चट्टानों में मौजूद कार्बन के आइसोटोपिक संकेत भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रमाण देते हैं।अध्ययन के मुताबिक उस प्राचीन दौर में सूक्ष्मजीव कार्बन डाइऑक्साइड को जैविक पदार्थ में बदलने जैसी जैविक प्रक्रिया में सक्षम थे।
भीतरदाढ़ी क्षेत्र सिंहभूम क्रेटान का हिस्सा है, जिसे पृथ्वी की अत्यंत प्राचीन महाद्वीपीय भूपर्पटी और चट्टानी संरचनाओं वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। पृथ्वी की आयु करीब 4.6 अरब वर्ष मानी जाती है, जबकि सिंहभूम क्षेत्र की चट्टानें पृथ्वी के शुरुआती भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण रही हैं।इस नई खोज से क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि यहां मिले नमूने पृथ्वी पर शुरुआती जीवन की परिस्थितियों को समझने के लिए प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध करा सकते हैं।
भूविज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार इस अध्ययन की सबसे बड़ी विशेषता चट्टानों का प्रत्यक्ष काल निर्धारण है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में मिले प्राचीन जीवन के प्रमाणों की उम्र आसपास की चट्टानों के आधार पर अनुमानित की गई थी।भीतरदाढ़ी के नमूनों की उम्र सीधे निर्धारित किए जाने से यह शोध शुरुआती जीवन के प्रमाणों की वैज्ञानिक विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। यह खोज पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती चरणों और अरबों वर्ष पहले मौजूद पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।