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Major shift in Bengal's budget: Allocation for minority and Madrasa education cut by 62 percent; government priorities have changed.
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पेश हुए भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बजट ने राज्य की वित्तीय और राजनीतिक दिशा में स्पष्ट बदलाव का संकेत दिया है। इस बार सरकार ने बजट का फोकस अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा से हटाकर महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, औद्योगिक निवेश और आधारभूत ढांचे के विस्तार पर केंद्रित किया है।
नए बजट की सबसे चर्चित घोषणा अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के लिए आवंटित राशि में भारी कमी है। भाजपा सरकार ने पिछली सरकार के मुकाबले इस मद में करीब 62 प्रतिशत की कटौती की है। इसे राज्य की नई वित्तीय प्राथमिकताओं के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने फरवरी 2026 में पेश किए गए अंतरिम बजट में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के लिए 5,713.61 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। उस समय इसे इस क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजटीय आवंटन माना गया था।
विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने ममता सरकार के इस बजट प्रावधान का लगातार विरोध किया था। पार्टी का आरोप था कि अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा पर अत्यधिक खर्च तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा है। अब सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने उसी मद में बड़ा बदलाव करते हुए बजट आवंटन में उल्लेखनीय कमी कर दी है।
साल 2011 में जब तृणमूल कांग्रेस पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई थी, तब अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग का बजट करीब 472 करोड़ रुपये था। इसके बाद ममता सरकार ने लगातार इस मद का बजट बढ़ाया और फरवरी 2026 के अंतरिम बजट तक यह बढ़कर 5,713.61 करोड़ रुपये पहुंच गया, यानी लगभग 15 वर्षों में इसमें 1100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई थी। अब भाजपा सरकार ने इस आवंटन में बड़ी कटौती कर अपनी अलग वित्तीय नीति का संकेत दिया है।