

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

mahasamund baloda belmundi diamond block five diamonds found in chhattisgarh
रायपुर। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान पांच हीरों की प्राप्ति हुई है। इनमें जेम क्वालिटी के हीरे भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में हीरों के प्राथमिक स्रोत यानी किम्बरलाइट बॉडी की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा किए गए अन्वेषण में 200 टन बल्क सैंपल का प्रसंस्करण किया गया, जिसके बाद कुल पांच हीरे प्राप्त हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि बल्क सैंपल में हीरों की मौजूदगी इस क्षेत्र की भूगर्भीय संभावनाओं को मजबूत करती है और भविष्य में बड़े पैमाने पर हीरा भंडार मिलने की उम्मीद बढ़ाती है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिजों का प्रमुख उत्पादक राज्य रहा है। अब हीरों की खोज से प्रदेश की खनिज विविधता को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत दोहन करते हुए स्थानीय स्तर पर उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसर विकसित करना है।
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड ने इस अन्वेषण में स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग और ड्रिलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया है। फिलहाल प्राप्त हीरों को एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज केवल पांच हीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में मौजूद संभावित हीरा भंडार के प्रारंभिक संकेत हैं। आने वाले समय में विस्तृत अन्वेषण के जरिए क्षेत्र की वास्तविक खनिज क्षमता का आकलन किया जाएगा, जिससे बड़े निवेश और खनन गतिविधियों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले गरियाबंद जिले के देवभोग (मैनपुर) क्षेत्र में किम्बरलाइट पाइप्स की खोज और पेयलीखंड व कोदौमाली क्षेत्रों से उच्च गुणवत्ता वाले हीरे मिलने के बाद छत्तीसगढ़ का नाम हीरा उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल हुआ था। महासमुंद की नई खोज अब राज्य के हीरा अन्वेषण को एक नए विस्तार की ओर ले जाती दिखाई दे रही है।