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Malaria outbreak in Kanker: 4 dead, 32 infected; Health Department steps up surveillance.
कांकेर। छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर जिले कांकेर में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में अब तक 3 छात्रों और 1 महिला समेत 4 लोगों की मौत हो चुकी है। सरडी, डोमारगढ़, मदेपोटे और चिचगांव गांव सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां 32 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। सभी मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप लगाकर स्क्रीनिंग और जांच अभियान तेज कर दिया है।
सरडी के बॉयज हॉस्टल में 11 छात्र मलेरिया पॉजिटिव पाए गए थे, जिनमें से एक छात्र की मौत हो गई। इसके अलावा सरकारी छात्रावास में रहने वाले दो अन्य छात्रों की भी जान चली गई। डोमारगढ़ गांव में तीन बहनें मलेरिया से संक्रमित मिली थीं, जिनमें 9 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।
27 जुलाई को भानुप्रतापपुर विकासखंड के चिचगांव निवासी राकेश्वरी कोला (25) की मौत हो गई। मितानिन द्वारा किए गए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) में उनकी रिपोर्ट मलेरिया पॉजिटिव आई थी और उन्हें दवाइयां भी दी गई थीं। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर.सी. ठाकुर ने बताया कि अस्पताल में किए गए स्लाइड टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। उनके अनुसार, रैपिड टेस्ट में कभी-कभी फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट भी आ सकती है, जिसकी पुष्टि स्लाइड टेस्ट से की जाती है।
मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच 10 से अधिक छात्र अलग-अलग अस्पतालों में इलाजरत हैं, जबकि दो छात्रों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग छात्रावासों, आश्रमों और प्रभावित गांवों में लगातार जांच अभियान चला रहा है।
मलेरिया के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया 28 जुलाई को कांकेर पहुंचे थे। उन्होंने बस्तर संभाग के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रोकथाम, उपचार और निगरानी के लिए कड़े निर्देश दिए। इसके बावजूद नए मामलों के सामने आने से प्रशासन की चिंता बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। मेडिकल टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। छात्रावासों और आश्रमों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं ताकि समय रहते संक्रमित मरीजों की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके।
मलेरिया का फिलहाल कोई सार्वभौमिक वैक्सीन आम उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। बीमारी होने पर डॉक्टर मरीज को एंटी-मलेरिया दवाएं और बुखार नियंत्रित करने की दवाएं देते हैं। दवा लेने के दौरान यदि किसी प्रकार के गंभीर दुष्प्रभाव दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
- मच्छरों के काटने से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें और शाम के समय विशेष सावधानी बरतें।
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- मच्छररोधी क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं।
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जांच और दवा वितरण अभियान में सहयोग करें।