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Matter reaches PMO; Ram Mandir Trust refuses to disclose financial details, citing SIT probe.
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र के बाद जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेनदेन और संपत्ति से जुड़ी जानकारी मांगी गई, तो ट्रस्ट ने फिलहाल कोई विवरण साझा करने से इनकार कर दिया। ट्रस्ट का कहना है कि पूरा मामला विशेष जांच दल (SIT) की जांच के दायरे में है, इसलिए जांच पूरी होने तक कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर ट्रस्ट के गठन से अब तक की वित्तीय गतिविधियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की थी। इसके बाद 12 जून को उन्होंने एक और पत्र भेजा। शिकायत के आधार पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया और बाद में पीएमओ ने मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए अयोध्या जिला प्रशासन के पास भेज दिया।
जिला प्रशासन की ओर से ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, भूमि खरीद-बिक्री और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मांगे गए। इस पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया कि एसआईटी जांच जारी है और जांच एजेंसी सभी जरूरी दस्तावेज जुटा रही है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले कोई भी वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
शिकायत में ट्रस्ट से कई अहम वित्तीय जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इनमें 'समर्पण निधि' अभियान से जुटाई गई राशि, नकद और ऑनलाइन दान, सोना-चांदी व अन्य बहुमूल्य उपहार, बैंक खातों का विवरण, वित्तीय लेनदेन, जमीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण पर हुए खर्च और ऑडिट रिपोर्ट शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच के दौरान वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में कई स्तरों पर कमियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड से जुड़े कुछ मामलों में ट्रस्ट के स्तर पर लापरवाही के संकेत मिले हैं। वहीं, चढ़ावे की गणना से जुड़े बैंक कर्मचारियों और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि ट्रस्ट ने अपने स्तर पर कुछ संदिग्ध कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई की है।
इसी बीच यह भी चर्चा तेज है कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया जा सकता है। मंदिर निर्माण का प्रमुख कार्य पूरा होने के बाद निर्माण समिति का कार्यकाल समाप्त होने की प्रक्रिया में है। हाल ही में नृपेंद्र मिश्र ने दानराशि में कथित गड़बड़ी को गंभीर मामला बताते हुए वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी के पास है और प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जा चुकी है। इसके बाद रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजे जाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई है। अब सभी की नजर अंतिम जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।