

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Operation Chakra-6: CBI's major strike against 'digital arrest' gang; raids conducted at 80 locations across 16 states.
नई दिल्ली। बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को देशव्यापी बड़ी कार्रवाई की। ‘ऑपरेशन चक्र’ के छठे चरण के तहत एजेंसी की 60 टीमों ने 16 राज्यों में एक साथ 80 स्थानों पर छापेमारी कर संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसा।
CBI की कार्रवाई पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में की गई। जांच एजेंसी के अनुसार यह नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था और बड़ी संख्या में लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार बना चुका था।
छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल के कोलकाता से संजीव शाहा और तमिलनाडु के चेन्नई से बी. नागेश को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर शेल कंपनियां बनाकर और म्यूल बैंक खातों के जरिए अवैध धन के लेन-देन का आरोप है। जांच में सामने आया है कि इन खातों के माध्यम से करीब दो करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि का लेन-देन किया गया था।
CBI की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलते-जुलते URL वाली फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इस वेबसाइट पर अदालत के आदेश जैसे दिखने वाले नकली दस्तावेज अपलोड किए जाते थे। इन्हें दिखाकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का भय पैदा किया जाता था और फिर उनसे पैसे ऐंठे जाते थे।
कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच के दौरान डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 200 से अधिक मामलों का पता चला है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं।
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक खतरनाक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, कोर्ट या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। फर्जी नोटिस, नकली वेबसाइट और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है। इस तरह की ठगी के शिकार केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि शिक्षित और पेशेवर लोग भी हो रहे हैं।
CBI और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, वीडियो कॉल, नोटिस या बैंक खाते में धन जमा कराने के निर्देश पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें।