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Modi government's big bet amid oil crisis: brake on inflation, clear refusal on lockdown
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए दो अहम फैसले लिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 122 डॉलर प्रति बैरल पार कर चुका है, जिससे देश में ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है।
पेट्रोल-डीजल सस्ता रखने की रणनीति
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
निर्यात पर टैक्स, देश में सप्लाई सुनिश्चित
ईंधन की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर टैक्स तय किया गया है। इसके अलावा रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे पेट्रोल का 50 प्रतिशत और डीजल का 30 प्रतिशत देश में ही बेचें।
कंपनियों का घाटा कम करने की कोशिश
तेल कंपनियां बढ़ती कीमतों के कारण भारी नुकसान झेल रही थीं। आंकड़ों के मुताबिक पेट्रोल पर 26 रुपये और डीजल पर 81.90 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा था। सरकार की यह कटौती इस नुकसान को संतुलित करने में मदद करेगी, हालांकि इससे सरकारी खजाने पर सालाना करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये का असर पड़ेगा।
लॉकडाउन की अफवाहों पर विराम
सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में किसी भी तरह के लॉकडाउन की योजना नहीं है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने राज्यसभा में कहा कि अफवाह फैलाने से बचना चाहिए और सरकार पूरी तरह स्थिति पर नजर रखे हुए है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने भी स्पष्ट किया कि ईंधन की सप्लाई पर्याप्त है और घबराने की जरूरत नहीं है।
पीएम का मंत्र: ‘टीम इंडिया’ बनकर करें मुकाबला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे कोरोना काल में केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया था, उसी तरह इस ऊर्जा संकट से भी सामूहिक प्रयास से निपटना होगा।
सप्लाई चेन में बदलाव, वैकल्पिक स्रोतों पर जोर
भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। मौजूदा हालात को देखते हुए सप्लाई चेन में बदलाव किया गया है और अब पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से तेल मंगाया जा रहा है। एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रूस और ऑस्ट्रेलिया से नए समझौते भी किए गए हैं।
हर वर्ग को राहत, सरकार का बड़ा संदेश
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को आम जनता के लिए बड़ी राहत बताया है। उनके अनुसार, इससे किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग को सीधा फायदा मिलेगा और वैश्विक संकट के बावजूद देश में महंगाई का दबाव कम रहेगा।