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MP News: Mysterious deaths in Kanha Tiger Reserve, A tigress and four cubs have died in nine days.
मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में नौ दिनों के भीतर एक बाघिन (टी-141) और उसके चार शावकों की लगातार हुई मौतों ने वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघिन और शावकों के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण (निमोनिया) पाया गया है। अब पार्क प्रबंधन यह पता लगाने में जुटा है कि संक्रमण किसी बाहरी जीव से फैला या जंगल के भीतर ही कोई संक्रमण का स्रोत मौजूद है।
वेटरनरी टीम ने किए पोस्टमार्टम, वायरल संक्रमण की आशंका
जबलपुर स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट से पहुंचे तीन विशेषज्ञ वेटरनरी डॉक्टरों की टीम ने बाघिन और एक शावक के शव का पोस्टमार्टम किया। प्रारंभिक जांच में फेफड़ों में संक्रमण मिलने के बाद वायरल संक्रमण या रक्त के जरिए बीमारी फैलने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ टीम सैंपल लेकर जांच के लिए लौट गई है। रिपोर्ट आने के बाद संक्रमण के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
गांवों में श्वानों का होगा सर्वे
कान्हा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि घटनास्थल के आसपास स्थित गांवों में अब श्वानों का स्वास्थ्य सर्वे कराया जाएगा। विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास करेंगे कि कहीं पालतू या आवारा कुत्तों के माध्यम से यह संक्रमण वन्यजीवों तक तो नहीं पहुंचा।
अप्रैल में लगातार हुईं बाघों की मौतें
अप्रैल महीने में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौतों की श्रृंखला ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रमुख घटनाक्रम
5 अप्रैल: कन्हारी बीट में आपसी संघर्ष में बाघिन ‘सुनैना’ की मौत।
21 अप्रैल: सरही परिक्षेत्र के अमाही नाले के पास एक शावक मृत मिला। प्रारंभ में इसे प्राकृतिक मौत बताया गया था। पोस्टमार्टम में उसका पेट खाली पाया गया।
23 अप्रैल: दूसरे नर शावक का शव सड़ी-गली अवस्था में मिला।
25 अप्रैल: तीसरी मादा शावक की मौत हुई, जिसकी वजह फेफड़ों में संक्रमण बताई गई।
26 अप्रैल: बाघिन टी-141 और एक शावक को रेस्क्यू कर मुक्की रेंज के क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया।
29 अप्रैल: क्वारंटाइन सेंटर में दोनों की मौत हो गई।
वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल
लगातार हो रही मौतों ने पार्क प्रबंधन की सतर्कता और शुरुआती निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संक्रमण की पहचान पहले हो जाती, तो संभवतः कुछ वन्यजीवों को बचाया जा सकता था। फिलहाल पूरे मामले पर भोपाल मुख्यालय को लगातार रिपोर्ट भेजी जा रही है और वन विभाग अलर्ट मोड पर है।