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भिलाई। एनएसपीसीएल (NSPCL) भिलाई द्वारा अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत संचालित ‘बालिका सशक्तिकरण मिशन 2026’ का भव्य समापन समारोह पुरैना स्थित एनएसपीसीएल परिसर में आयोजित किया गया। एक माह तक चले इस आवासीय प्रशिक्षण शिविर ने ग्रामीण और वंचित वर्ग की बेटियों को शिक्षा, तकनीकी ज्ञान, आत्मरक्षा, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास का व्यापक प्रशिक्षण देकर उनके भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास किया।

समापन समारोह का शुभारंभ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की महानिरीक्षक नीलिमा रानी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर बच्चियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लगभग एक घंटे तक चले छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति पर आधारित नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में विशेष आकर्षण पैदा किया।
80 बालिकाओं को मिला जीवन कौशल का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के तहत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से चयनित 10 से 13 वर्ष आयु वर्ग की 80 बालिकाओं को शामिल किया गया। पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या दोगुनी से अधिक रही, जो इस अभियान की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाती है।
28 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और आधुनिक शिक्षा से सशक्त बनाना था। इसके लिए विशेष रूप से तैयार पाठ्यक्रम में शैक्षणिक, तकनीकी, रचनात्मक और सामाजिक विकास से जुड़ी गतिविधियों को शामिल किया गया।
पढ़ाई के साथ तकनीक और साइबर सुरक्षा की शिक्षा
शिविर के दौरान बालिकाओं को अंग्रेजी, हिंदी, गणित और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई कराई गई। साथ ही कंप्यूटर साइंस और साइबर सिक्योरिटी का प्रशिक्षण देकर उन्हें डिजिटल दुनिया की चुनौतियों और अवसरों से परिचित कराया गया।
एनएसपीसीएल का मानना है कि आधुनिक युग में तकनीकी ज्ञान बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रचनात्मक प्रतिभा को भी मिला मंच
शिक्षा के साथ-साथ बालिकाओं की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। ड्राइंग, पेंटिंग, आर्ट एंड क्राफ्ट, संगीत, नृत्य, नाटक और वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया गया।
समापन समारोह में प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि एक महीने के प्रशिक्षण के दौरान बच्चियों ने न केवल नई चीजें सीखीं, बल्कि अपनी छिपी प्रतिभाओं को भी पहचानने का अवसर पाया।
योग, खेल और मार्शल आर्ट्स से बढ़ा आत्मविश्वास
प्रतिदिन सुबह योग, खेलकूद और फिटनेस गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसके साथ ही आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि बच्चियां शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें।
शिविर का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि बेटियों में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित करना भी था।
सामाजिक जागरूकता पर विशेष फोकस
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता, प्रभावी संवाद, आपसी संबंध, लैंगिक समानता और सामाजिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने बच्चियों को जागरूक नागरिक बनने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
चार मजबूत स्तंभों पर आधारित रहा शिविर
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी सुरभि त्रिपाठी ने बताया कि शिविर की तैयारी लगभग एक महीने पहले शुरू कर दी गई थी। चयनित बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और उनकी सभी आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा गया।
पूरा कैंप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रहा—
पौष्टिक आहार
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं
बहुआयामी शिक्षा
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
शिविर में डॉक्टर और एम्बुलेंस की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रही। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए तथा सुरक्षा कारणों से कैंप क्षेत्र में पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध रखा गया।
देशभर में 10 हजार बालिकाओं को जोड़ने का लक्ष्य
समारोह को संबोधित करते हुए नील कुमार शर्मा कार्यकारी निदेशक व्यापार प्रमुख इकाई एन एस पी सी एल पुरैना भिलाई ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल भिलाई तक सीमित नहीं है। एनटीपीसी और उसकी संयुक्त उद्यम कंपनियों द्वारा देशभर के लगभग 45 स्थानों पर इस मिशन का संचालन किया जा रहा है और करीब 10 हजार बालिकाओं को इससे जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे न रहें, यही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
मेधावी बच्चियों को 12वीं तक मिलेगा सहयोग
नील कुमार शर्मा ने बताया कि एनएसपीसीएल हर वर्ष समर वेकेशन के दौरान 80 बालिकाओं को 28 दिनों का विशेष प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण के बाद मेधावी बच्चियों का चयन कर उन्हें 11वीं और 12वीं कक्षा तक शैक्षणिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। इसके अलावा दिसंबर माह में फॉलो-अप कार्यक्रम आयोजित कर बच्चियों की प्रगति की समीक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान बच्चियों को योग, मार्शल आर्ट्स, अंग्रेजी, गणित, कंप्यूटर शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी दी गई। साथ ही महिला उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं (Women Achievers) के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए ताकि बच्चियां प्रेरित हो सकें और अपने जीवन के लिए बड़े सपने देख सकें।
बच्चियों के प्रदर्शन ने जीता सभी का दिल
समापन समारोह में बच्चियों की मंचीय प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए नील कुमार शर्मा ने कहा कि बेहद कम समय में बच्चियों ने जिस स्तर का प्रदर्शन किया, वह अद्भुत और भावुक कर देने वाला था। कार्यक्रम देखने वाले सभी लोग उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास से प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि पिछले 28 दिनों में प्रशिक्षण के दौरान बच्चियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और व्यवहार में जो सकारात्मक बदलाव आया है, वह इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है।
ग्रामीण बेटियों के लिए नई उम्मीद
‘बालिका सशक्तिकरण मिशन 2026’ केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं बल्कि ग्रामीण और वंचित वर्ग की बेटियों को शिक्षा, आत्मविश्वास और अवसरों से जोड़ने वाला एक व्यापक सामाजिक अभियान बन चुका है। एक महीने बाद जब ये बच्चियां अपने घर लौटीं, तो उनके साथ केवल प्रमाण पत्र नहीं बल्कि नए सपने, नई ऊर्जा और बेहतर भविष्य का आत्मविश्वास भी था।
एनएसपीसीएल की यह पहल उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने का सपना देखती हैं।