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Nandkumar Sai's statement sparks political uproar, sparks debate on tribal population
रायपुर। रायपुर में आयोजित सर्व आदिवासी समाज की बैठक के दौरान वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय के बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। बैठक में उन्होंने आदिवासी परिवारों से कम से कम पांच बच्चे पैदा करने की अपील की, जिसके बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
जनसंख्या संतुलन और राजनीतिक ताकत पर चिंता
नंदकुमार साय ने कहा कि आदिवासी समाज में जन्म दर घटने से सामाजिक और राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि "हम दो, हमारे दो" जैसे नारे का सबसे अधिक असर आदिवासी समुदाय पर पड़ा है, जिसका परिणाम अब सामने दिख रहा है।
जनगणना और धर्म कोड को लेकर सतर्क रहने की सलाह
बैठक में उन्होंने आगामी जनगणना को लेकर भी समाज को सावधान रहने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि धर्म कोड के कॉलम में स्पष्ट रूप से आदिवासी पहचान दर्ज कराई जाए और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर नजर रखी जाए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल
इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और भारतीय जनता पार्टी से जवाब मांगा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार को इस पर अपना स्पष्ट रुख बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित समाज के लिए इस तरह की सलाह उचित नहीं मानी जा सकती और इसे सिर्फ व्यक्तिगत राय कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री का बयान
विष्णु देव साय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नंदकुमार साय का व्यक्तिगत विचार है। उन्होंने यह भी कहा कि एक वरिष्ठ नेता होने के नाते उन्होंने यह बात सोच-समझकर ही रखी होगी।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
इस बयान के बाद आदिवासी समाज की जनसंख्या, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर इसे सामाजिक चिंता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील और विवादित बयान माना जा रहा है।