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New twist in gardener's electrocution death case: FIR registered against society manager after seven months; family alleges office-bearers are being shielded.
रायपुर। राजधानी के कोटा स्थित क्रेस्ट ग्रीन सोसायटी में करंट लगने से माली की मौत के मामले में सात महीने बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सोसायटी के मैनेजर के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है। हालांकि मृतक के परिजनों ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सोसायटी के पदाधिकारियों को जानबूझकर बचाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, कोटा निवासी 56 वर्षीय एस. तूफान बस क्रेस्ट ग्रीन सोसायटी में माली के रूप में कार्यरत थे। 1 दिसंबर 2025 की सुबह वह ड्यूटी के दौरान स्टोर रूम से लोहे की सीढ़ी लेकर पेड़ों की छंटाई के लिए जा रहे थे। इसी दौरान सीढ़ी ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई, जिससे उन्हें जोरदार करंट लगा। गंभीर रूप से घायल तूफान को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई।
मृतक की पत्नी गायत्री ने आरोप लगाया कि घटना के बाद सोसायटी के अध्यक्ष विनय अग्रवाल, उपाध्यक्ष शंकर बजाज समेत अन्य पदाधिकारियों ने 20 लाख रुपये मुआवजा देने का भरोसा दिलाया। साथ ही परिवार पर एफआईआर दर्ज नहीं कराने और पोस्टमार्टम से बचने का दबाव बनाया गया। आश्वासन पर विश्वास करते हुए परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार कर दिया।उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो मुआवजा दिया गया और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर सोसायटी के मैनेजर शिवम कुमार के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि घटना के समय तूफान मैनेजर के निर्देश पर ही लोहे की सीढ़ी लेकर जा रहे थे।
सोसायटी के अध्यक्ष विनय अग्रवाल, उपाध्यक्ष शंकर बजाज और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। सरस्वती नगर थाना प्रभारी ने बताया कि शुरुआती जांच के आधार पर मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यदि आगे की जांच में सोसायटी के पदाधिकारियों की भूमिका से जुड़े साक्ष्य सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।