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News of deaths related to Tuta protest site is baseless, department denied
रायपुर। तूता धरना स्थल पर रसोईयों की हड़ताल के दौरान दो रसोईयों की मृत्यु होने से संबंधित खबरों को लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों मौतों का धरना स्थल या हड़ताल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार हड़ताल पर बैठे रसोईयों के प्रतिनिधियों के साथ संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय एवं सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग के बीच चर्चा हुई थी। इस दौरान शासन ने रसोईयों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाते हुए उनके मानदेय में 25 प्रतिशत वृद्धि, यानी 500 रुपये की बढ़ोतरी का निर्णय लिया था और हड़ताल समाप्त कर घर लौटने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद कुछ रसोईयों ने धरना स्थल पर बने रहने का निर्णय लिया।
संचालनालय ने बताया कि जिन दो रसोईयों की मृत्यु की खबरें प्रसारित की जा रही हैं, उनमें से एक बालोद जिले की निवासी थी, जो 20 और 21 जनवरी को धरना स्थल पर मौजूद थी, लेकिन बाद में अपने निवास स्थान लौट गई थी। वहां तबीयत बिगड़ने पर उसे दल्ली राजहरा स्थित शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
वहीं दूसरी महिला रसोईया बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड की निवासी थी, जो पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। उसका इलाज भिलाई स्थित शंकराचार्य अस्पताल में चल रहा था, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हुई।
लोक शिक्षण संचालनालय ने दोहराया कि दोनों ही मामलों में मृत्यु का धरना स्थल अथवा हड़ताल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। राज्य शासन सभी रसोईयों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है तथा उनके हित में आवश्यक निर्णय और कार्यवाही लगातार की जा रही है।