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Over 50,000 cases disposed of in three and a half years... Chief Justice Ramesh Sinha delivers a message of fearlessness to the judiciary upon his farewell.
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। उनके सम्मान में नवा रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में जिला एवं सत्र न्यायालय की ओर से विदाई समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से बिना किसी दबाव या भय के स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर न्याय करने का आह्वान किया।चीफ जस्टिस सिन्हा ने कहा कि अदालतें केवल ईंट-पत्थर से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि आम नागरिक के भरोसे और उम्मीद का केंद्र हैं। इसलिए न्यायिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखना और लोगों के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देना हर न्यायिक अधिकारी की जिम्मेदारी है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया। मई 2023 से 1 सितंबर 2026 तक कुल 50,228 मामलों का निराकरण किया गया।इनमें सिंगल बेंच के 32,600 और डिवीजन बेंच के 17,628 मामले शामिल हैं। अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का लक्ष्य केवल लंबित प्रकरणों का निपटारा करना नहीं, बल्कि आम लोगों का न्याय प्रणाली पर विश्वास मजबूत करना भी है।
मार्च 2023 में पदभार संभालने के बाद चीफ जस्टिस सिन्हा के कार्यकाल में हाईकोर्ट ने आम नागरिकों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लिया। समाचार पत्रों में प्रकाशित जनसमस्याओं को आधार बनाकर कई मामलों को जनहित याचिका के रूप में लिया गया।स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पर्यावरण, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित मामलों में शासन और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया। कई मामलों में अधिकारियों को अदालत में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश भी दिए गए।
चीफ जस्टिस सिन्हा के कार्यकाल में हाईकोर्ट की सक्रियता से कई महत्वपूर्ण जनसमस्याएं न्यायिक जांच के दायरे में आईं। इनमें अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का मामला, सरकारी स्कूलों में खराब शौचालयों की स्थिति और सड़कों की बदहाली जैसे विषय प्रमुख रहे।सरकारी स्कूलों में शौचालयों की स्थिति को लेकर शासन से जवाब तलब किए जाने के बाद 1,278 नए शौचालय बनाने और 710 शौचालयों की मरम्मत की प्रक्रिया आगे बढ़ी।इसके अलावा खराब सड़क के कारण बुजुर्ग की मौत, शराब दुकानों के बाहर भीड़ और यातायात जाम, खुले बिजली तारों से होने वाली मौतों, चाइनीज मांझे से बच्चों को होने वाले खतरे और आवारा मवेशियों के कारण सड़क हादसों जैसे मुद्दों पर भी हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया।
इन मामलों में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने के साथ कई बार उन्हें अदालत में बुलाकर सीधे स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया। इससे शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में न्यायपालिका की भूमिका सामने आई।विदाई समारोह में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने कहा कि जिला न्यायपालिका को चीफ जस्टिस सिन्हा का लगातार मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सहयोग मिलता रहा। समारोह के दौरान चीफ जस्टिस सिन्हा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।