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Suspicion of witchcraft led to murder... matter escalated to the burning of the body... five accused arrested in Dantewada.
दंतेवाड़ा। अरनपुर थाना क्षेत्र के पहुंचविहीन पोरोपरिया पटेलपारा में अंधविश्वास से जुड़ी हिंसा का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां जादू-टोना करने के संदेह में एक व्यक्ति की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। इसके बाद आरोपियों ने शव को श्मशान घाट ले जाकर जला दिया।घटना 1 सितंबर की बताई जा रही है, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी करीब तीन दिन बाद मिली। बताया जा रहा है कि आरोपियों के डर और गांव की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण तत्काल किसी ने पुलिस तक पहुंचने की हिम्मत नहीं की।मृतक के परिवार के एक सदस्य ने किसी तरह छिपकर पुलिस तक पहुंचकर घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने बड़ी संख्या में जवानों को गांव भेजकर कार्रवाई शुरू की।
पुलिस के अनुसार, हत्या के दौरान मृतक के परिवार के दो अन्य सदस्यों ने आरोपियों का विरोध किया था। इस पर उनके साथ भी मारपीट की गई। घायलों में एक महिला और एक पुरुष शामिल हैं।दोनों को पहले कुआकोंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल दंतेवाड़ा रेफर किया गया।घटना के बाद से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम को घटनास्थल पर बुलाया। एफएसएल टीम ने वारदात वाली जगह और श्मशान घाट का निरीक्षण कर उपलब्ध साक्ष्य जुटाए हैं।पुलिस घायलों के बयान, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और ग्रामीणों से पूछताछ के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मृतक पर जादू-टोना करने का संदेह क्यों किया गया और विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई थी।
पुलिस ने मामले में कोसा मंडावी, नंदा मंडावी, नंदा कोवासी, आयता कवासी, भीमा मंडावी और हिड़मा बारसे की पहचान की है। इनमें से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि सभी छह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई है।पुलिस हत्या के साथ शव को जलाने और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
पोरोपरिया की यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में जादू-टोना और अंधविश्वास के नाम पर होने वाली हिंसा की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। पुलिस अब पूरे मामले की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के साथ यह भी जांच कर रही है कि अंधविश्वास से जुड़ा संदेह इतना गंभीर कैसे हुआ कि मामला हत्या तक पहुंच गया।