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PSC-2021 Recruitment Case: Following High Court order, 11 Deputy Collectors got appointments, 4 candidates are currently on hold
रायपुर। बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2021 भर्ती मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने 11 चयनित अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति देते हुए उनकी पोस्टिंग जारी कर दी है, जबकि पूर्व पीएससी अध्यक्ष के परिजनों सहित 4 अभ्यर्थियों की नियुक्ति फिलहाल रोक दी गई है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद सक्रिय हुई सरकार
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ जांच में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं, उन्हें नियुक्ति दी जा सकती है। इसके बाद राज्य सरकार ने शेष योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
सीबीआई जांच के घेरे में भर्ती प्रक्रिया
इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरोकर रही है। आरोप है कि तत्कालीन पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने करीबी रिश्तेदारों और परिचितों को अनुचित लाभ दिलाया। जांच एजेंसी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है और कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। फिलहाल कुछ आरोपी न्यायिक हिरासत में भी हैं।
चार अभ्यर्थियों की नियुक्ति फिलहाल रोकी गई
सरकार ने जिन चार अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगाई है, उनमें पूर्व पीएससी अध्यक्ष के परिजन भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन मामलों में जांच पूरी नहीं होने और साक्ष्य की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण फिलहाल नियुक्ति रोकने का निर्णय लिया गया है।
इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
नियुक्ति पाए 11 डिप्टी कलेक्टरों की पोस्टिंग विभिन्न जिलों में की गई है। प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार हैं—
प्रज्ञा नायक : बलरामपुर-रामानुजगंज
अनन्या अग्रवाल : दुर्ग
विजय राणा : सारंगढ़-बिलाईगढ़
अमित कुमार भारद्वाज : दंतेवाड़ा
खुशबू बिजौरा : कोरिया
नेहा खलखो : मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
प्रिंसी तंबोली : सरगुजा
साक्षी ध्रुव : गरियाबंद
निखिल खलखो : रायगढ़
महेंद्र कुमार सिदार : नारायणपुर
राजेंद्र कुमार कौशिक : कोंडागांव
भर्ती प्रक्रिया पर अब भी निगाहें टिकी
CGPSC 2021 विवाद अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार का कहना है कि जिन मामलों में जांच चल रही है, उन पर अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा। वहीं अभ्यर्थियों और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर राहत और असमंजस दोनों की स्थिति बनी हुई है।