

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Pakistan will return to its old identity, with Lahore's streets being renamed Ram Gali, Dharampura, and Queens Road.
लाहौर। पाकिस्तान में दशकों पहले बदले गए हिंदू और ब्रिटिश कालीन इलाकों, सड़कों और चौकों के पुराने नामों को फिर से बहाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से लाहौर की कई सड़कों और मोहल्लों के मूल नाम वापस लाने की योजना को मंजूरी दे दी है।
पाकिस्तानी पंजाब सरकार के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री मरियम नवाज के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया है। यह पहल पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा संचालित “लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल प्रोजेक्ट” का हिस्सा बताई जा रही है।
कई इलाकों के पुराने नाम होंगे बहाल
योजना के तहत लाहौर की कई सड़कों, गलियों और चौकों के पुराने नाम फिर से लागू किए जाएंगे। इनमें फातिमा जिन्ना रोड को फिर से क्वींस रोड, इस्लामपुरा को कृष्णनगर, मुस्तफाबाद को धर्मपुरा और बाबरी मस्जिद चौक को जैन मंदिर चौक के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह रहमान गली का नाम दोबारा राम गली किया जाएगा।
इसके अलावा जिन अन्य ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की तैयारी है, उनमें डेविस रोड, लारेंस रोड, एम्प्रेस रोड, संत नगर, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरी, शांति नगर और आउटफॉल रोड शामिल हैं।
दशकों पहले बदल दिए गए थे नाम
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान बनने के बाद और विशेष रूप से पिछले कई दशकों में अलग-अलग सरकारों ने ब्रिटिश शासन और हिंदू संस्कृति से जुड़े नामों को हटाकर इस्लामी या स्थानीय नेताओं के नाम पर सड़कों और इलाकों का नामकरण कर दिया था।
अब पाकिस्तान सरकार इसे ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे लाहौर की पुरानी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में मदद मिलेगी और शहर की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
पर्यटन और विरासत संरक्षण पर फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को नए तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश भी माना जा रहा है। लाहौर को दक्षिण एशिया के ऐतिहासिक शहरों में गिना जाता है और यहां आज भी विभाजन से पहले की कई इमारतें, मंदिर, बाजार और पुरानी बस्तियां मौजूद हैं।