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Xi Jinping and Putin united against Trump's policies, strongly objecting to his nuclear policy and missile shield.
नई दिल्ली। चीन और रूस ने अमेरिका की रक्षा और परमाणु नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बीजिंग दौरे को लेकर किए गए बड़े दावों की हवा कुछ ही दिनों में निकलती दिखाई दे रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका की “गैरजिम्मेदाराना परमाणु नीति” और उसके नए मिसाइल डिफेंस प्लान की तीखी आलोचना की है।
‘गोल्डन डोम’ मिसाइल शील्ड को बताया वैश्विक खतरा
दोनों नेताओं ने अमेरिका के “गोल्डन डोम” मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि भूमि से अंतरिक्ष तक जाकर मिसाइल हमलों को रोकने वाली यह तकनीक वैश्विक रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। संयुक्त बयान में कहा गया कि इस तरह की सैन्य परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं और हथियारों की नई होड़ को जन्म देंगी।
परमाणु हथियार समझौते पर भी अमेरिका घिरा
रूस और चीन ने अमेरिका पर परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते को आगे बढ़ाने में रुचि न दिखाने का आरोप लगाया। राष्ट्रपति पुतिन कई बार इस समझौते के नवीनीकरण की अपील कर चुके हैं, लेकिन अमेरिका की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। गौरतलब है कि दुनिया में सबसे अधिक लगभग छह हजार परमाणु हथियार रूस के पास हैं, जबकि अमेरिका दूसरे स्थान पर है।
पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने की अपील
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव को लेकर भी चिंता जताई। शी और पुतिन ने क्षेत्र में तत्काल युद्धविराम और शांति बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए संघर्षों को जल्द खत्म करना जरूरी है।
यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ा चीन-रूस व्यापार
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 228 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है। हालिया बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापारिक सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई।
‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ पाइपलाइन पर नहीं बनी सहमति
हालांकि दोनों देशों के बीच 2,600 किलोमीटर लंबी “पावर ऑफ साइबेरिया-2” गैस पाइपलाइन परियोजना पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है। कई वर्षों से इस मुद्दे पर बातचीत जारी है, लेकिन ताजा बैठक में भी कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया।
13 वर्षों में 41 मुलाकातें, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत
शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन पिछले 13 वर्षों में 41 बार मुलाकात कर चुके हैं। दोनों नेताओं ने 2022 में रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें दोनों देशों के रिश्तों को “सीमाओं से परे साझेदारी” बताया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन के हालिया बीजिंग दौरे के बाद चीन-अमेरिका रिश्तों में संभावित नरमी और जी-7 की जगह “जी-2” जैसी अवधारणाओं को बड़ा झटका लगा है।