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Paper leak at Indira Gandhi Agricultural University
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय यानि आइजेकेवी में कथित तौर पर पेपर लीक के मामले ने तूल पकड़ लिया। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र वाट्सएप पर वायरल होने और परीक्षा में वही प्रश्नपत्र आने के आरोपों को लेकर एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी पहुंचे और नारेबाजी करते हुए घेराव किया। इस प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय में पुलिस बल तैनात किया गया था। इधर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने 60 से 70 हजार रुपए में प्रश्नपत्र बिकने का आरोप लगाया है।
वहीं प्रदर्शन के बीच रजिस्ट्रार डा. कपिल देव दीपक ने इस मामले में 72 घंटे के समय मांगा है। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने नोटों की माला और डायपर लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन हर बार जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। एनएसयूआई ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। दरअसल, आइजेकेवी में बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा को लेकर विवाद सामने आया है।
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच विश्वविद्यालय के एक उच्च अधिकारी ने दावा किया कि जांच टीम कथित आरोपी तक पहुंचने के करीब है। अधिकारी के अनुसार, आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है। हालांकि, मामले में आरोपी की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
इस विरोध प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा. कपिल देव दीपक प्रदर्शनकारियों के सामने पहुंचे और अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, कि इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है, जो जांच कर रही है और जल्द ही कथित आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए 72 घंटे का समय मांगा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह भरोसा मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आरोपी की पहचान और कार्रवाई की मांग दोहराई। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कहा, कि 72 घंटे की समय-सीमा के भीतर अगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आपको बता दें, कि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन की शिकायत पर रायपुर के तेलीबांधा थाने में आज्ञात आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5 और 10 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
वहीं आपको यह भी बता दें, कि विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के परीक्षा प्रभारी स्नातक एवं कृषि महाविद्यालय कवर्धा के अधिष्ठाता को सुबह ई-मेल से प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली। एफआइआर के अनुसार एक ई-मेल सुबह 8.41बजे कृषि महाविद्यालय कवर्धा को भेजा गया। इसके बाद अधिष्ठाता ने सुबह करीब 9.30 बजे विश्वविद्यालय के निदेशक शिक्षण को प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी दी। इसी प्रकार वरिष्ठ विज्ञानी और स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी डा. एनआर रंगारे को भी सुबह 8.54 बजे ई-मेल से प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना दी गई। विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार वाट्सएप पर भी प्रश्नपत्र के कुछ प्रश्नों की सामग्री वायरल होने की जानकारी सामने आई थी।